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सैंज के 3 गांव शुगाड़, शक्टी व मरौड़, यहां न बिजली, न School, न Hospital

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कुल्लू। कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जहां पर न सड़क है, न बिजली, न स्कूल और न ही अस्पताल। जरा सोचिए वहां के लोगों का जीवन कैसा होगा… ये हाल एक-दो नहीं कुल्लू जिला के बंजार विधानसभा क्षेत्र की सैंज घाटी में तीन गांवों का है। आलम यह है कि दूर दराज के क्षेत्र के  शुगाड़, शक्टी व मरौड़ में ग्रामीण बिना बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में जीवन यापन कर रहे है। आजादी के 70 वर्षों के बाद भी तीन गांवों में बिजली, सड़क, स्वास्थ्य,शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाए नहीं मिल रही है।

20 किमी पैदल चलकर पहुंचाते हैं घर में राशन

वैसे तो सैंज घाटी में करीब 15 मैगावॉट के पावर प्रोजेक्ट  सरकार  द्वारा लगाए गए है परन्तु इन गांवों के 200 लोग अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं। बिजली के उपकरण व कंप्यूटर आदि के बारे में सोचना तो यहां के लोगों के लिए दूर की बात है। स्थानीय निवासी सीता देवी ने बताया कि तीनों गांव में करीब तीन सौ के करीब ग्रामीण बिना बिजली, सड़क, स्वास्थ्य सुविधाओं के जीने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि यहां पर बच्चे लैंप की रोशनी में पढ़ाई करते हैं। 20 किलोमीटर दूर से राशन पानी पीठ पर उठाकर गांव तक पहुंचाना पड़ता है। अस्पताल व डिस्पेंसरी न होने से गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर उठाकर 20 किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कई बार तो गर्भवती महिलाओं का प्रसव रास्ते में  ही हो जाता और मां- बच्चे की जान भी चली जाती है।

गांव तक पहुंचने के लिए रास्ते भी उबड़ खाबड़ है। प्राइमरी शिक्षा के लिए छोटे बच्चों को छह किलोमीटर दूर शक्टी पहुंचना पड़ता है।  सीनियर सेकेंडरी की पढ़ाई के लिए 20 किलोमीटर शैंशर जाना पड़ता है। हालत यह है कि गांव का एक ही छात्र कॉलेज तक पहुंच पाया है। 100 वर्षीय शाड़ी देवी ने बताया कि उन्हें गांव में बिजली व सड़क पहुंचने का इंतजार है। चुनाव के समय नेता गांव तक एक ही बार पहुंचते हैं फिर पांच वर्ष के बाद दर्शन देते हैं। एक बार डीसी और सत्य प्रकाश व महेश्वर सिंह यहां पर तो आए पर ग्रामीणों के लिए बिजली व सड़क तक नहीं पहुंचा पाए। स्थानीय ग्रामीणा लगन चंद ने बताया कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि सभी गांवों तक बिजली व सड़क पहुंचाएंगे परन्तु हमारे गांव तक न जाने कब बिजली व सड़क पहुंच पाएगी।

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