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मेडिसिन्स के साइड इफेक्ट अब और नहीं, वैज्ञानिकों ने खोजा समाधान

साइड इफेक्ट रोकने के लिए तैयार की जा रही है दूसरी दवा

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नई दिल्ली। जो लोग अबतक दवाइयों के साइड इफेक्ट का शिकार होते रहे हैं और वर्षों से यह तकलीफ उठाते रहे हैं संभवतः उन्हें अब इस परेशानी से छुटकारा मिल सकेगा। वैज्ञानिक अब एक नई तकनीक विकसित कर रहे हैं जो दवाओं को सुरक्षित बनाएगी तथा जो साइड इफेक्ट से फ्री होंगी। किसी भी दवा के कंपाउंड के मॉलीक्यूल्स अपने लोकेशन में अलग-अलग प्रभाव डालते हैं।

शोधकर्ताओं ने यह तय किया कि थोड़ा हेरफेर करके मॉलीक्यूल्स को इस तरह प्रायोजित किया जाए कि उनका वहीं असर हो जहां उनकी जरूरत है और वे वहां असर न करें जहां वे नुकसान पहुंचाते हैं। दरअसल साइड इफेक्ट की समस्या बनती है और आपको अनुमान ही नहीं होता कि वही मालीक्यूल्स उसी सेल में अलग असर डाल रहे हैं। कोई भी दवा जो बीमारियों के निदान के लिए आती है भले ही थोड़े या ज्यादा हों पर उसके साइड इफेक्ट होते ही हैं। अबतक इस तरह चलता रहा है कि अगर दवा काम नहीं कर रही है या नुकसान पहुंचा रही है तो उसे रोकने के लिए दूसरी दवा तैयार कर लेते हैं।

यह नया प्रयोग कुछ अलग है। देखा गया कि शरीर के एक हिस्से में एक मॉलीक्यूल कुछ प्रभाव दे रहा होता है तो उसी समय वही शरीर के दूसरे हिस्से में एक दूसरा प्रभाव दे रहा होता है। ऐसे में एक मॉलीक्यूल के बहुत सारे फंक्शंस को रोकने की जगह डाक्टर्स एक खास मॉलीक्यूल को खास लोकेशन पर ही काम करने के लिए तैयार करेंगे। दवाओं में यह एक नया प्रयोग है जिसमें दवा को मरीज की जरूरत के अनुसार ही तैयार किया जाएगा। ऐसा अनुमान है कि यह तकनीक कई बीमारियों में फायदेमंद होगी मसलन कैंसर और अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्या में भी इसका फायदा उठाया जा सकता है। इससे एक और लाभ होगा कि रिसर्चर्स यह पता लगा सकेंगे कौन से मॉलक्यूल्स काम करें और किसे रोका जाए।

 

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