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दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज होते ही होगी पति की फौरन गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही फैसला पलटा, कहा - पीड़ित महिला की सुरक्षा के लिए यह जरूरी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के मामले में पति की फौरी गिरफ्तारी पर रोक हटा ली है। गिरफ्तारी के लिए जिले के परिवार कल्याण समिति की रिपोर्ट आने तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। जैसे ही धारा 498-ए का मामला दर्ज हुआ, पुलिस फौरन पति को गिरफ्तार कर सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दहेज प्रताड़ना से पीड़ित महिला की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपियों के लिए अग्रिम जमानत का विकल्प खुला है।

पलटा अपना ही फैसला

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि दहेज प्रताड़ना के केस में सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी। लेकिन शुक्रवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने इस फैसले को पलट दिया। इससे पहले भी बेंच ने कहा था कि वह दहेज प्रताड़ना मामले में दिए फैसले में पति और ससुराल वालों को दिए गए सेफगार्ड से सहमत नहीं हैं।

क्या था दो जजों की बेंच का फैसला

27 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने कहा था कि आईपीसी की धारा-498 ए यानी दहेज प्रताड़ना मामले में गिरफ्तारी सीधे नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए उससे पहले नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की और लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि वह प्रत्येक जिले में परिवार कल्याण समिति का गठन करे। इसमें सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हों।

क्या कहा चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने

13 अक्टूबर 2017 को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने कहा था कि इस मामले में दो जजों की बेंच ने 27 जुलाई को जो आदेश पारित कर तत्काल गिरफ्तारी पर रोक संबंधी गाइडलाइंस बनाई है, उससे वह सहमत नहीं हैं। बेंच ने कहा था कि हम कानून नहीं बना सकते हैं, बल्कि उसकी व्याख्या कर सकते हैं। अदालत ने कहा था कि ऐसा लगता है कि 498ए के दायरे को हल्का करना महिला को इस कानून के तहत मिले अधिकार के खिलाफ जाता है।

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