Advertisements

आईजीएमसी की पार्किंग पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मांगा जवाब

पूछा, कब तक बनेगी आईजीएमसी के नजदीक अम्रुत मिशन के तहत पार्किंग

- Advertisement -

शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने आईजीएमसी में पार्किंग की समस्या को लेकर दायर याचिका में मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह 2 सप्ताह के भीतर यह बताएं कि आईजीएमसी के पास पर्याप्त पार्किंग स्थान मुहैया करवाने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं? मुख्य सचिव को यह भी बताना होगा कि आईजीएमसी में तैनात डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के पास कितनी गाडिय़ां हैं, जिन्हें आईजीएमसी परिसर के आसपास खड़ा किया जाता है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से यह भी पूछा है कि कितने समय के भीतर आईजीएमसी के नजदीक अम्रुत मिशन के तहत पार्किंग का निर्माण कर लिया जाएगा?

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि मुख्य सचिव उपरोक्त तथ्य बताने में असमर्थ रहे तो अगली सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट में उपस्थित रहना होगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेश चंदेल द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात उपरोक्त आदेश पारित किए। याचिका कर्ता के अनुसार आईजीएमसी अस्पताल के पास मरीजों व तीमारदारों सहित स्टाफ के लिए भी पर्याप्त पार्किंग स्थल नहीं है, जिस कारण यहां सभी जरूरतमंद लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

याचिका कर्ता का कहना है कि अप्रैल 2017 में ऑडिटोरियम के साथ अम्रुत मिशन के तहत बहुमंजिला पार्किंग बनाने के लिये पूर्व सीएम ने आधारशिला रखी थी, परंतु अभी तक इस पर कोई बात आगे नहीं बढ़ी। कोर्ट ने कहा कि संजौली आईजीएमसी सडक़ पर पार्किंग की व्यवस्था करना समस्या का कोई समाधान नहीं है। कोर्ट ने खेद जताया कि कोर्ट ने जब महाधिवक्ता को सलाह के तौर पर बताया था कि वह लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता से सलाह कर्र आईजीएमसी के नए बन रहे भवन के टॉप फ्लोर पर पार्किंग की संभावनाएं तलाशें, परंतु ऐसा न करके लगता है कि कोर्ट के इन सुझावों के प्रति सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

Advertisements

- Advertisement -

%d bloggers like this: