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आपसी कलह में उलझी Congress के लिए सुखद नहीं आने वाले दिन

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 लोकिन्दर बेक्टा/शिमला। विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, लेकिन कांग्रेस अभी तक अपनी खींचतान से बाहर नहीं निकल पा रही है। सीएम वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बीच शह-मात का खेल बदस्तूर जारी है और इसके बीच कांग्रेस संगठन की गतिविधियां भी सीमित हैं और इनके नेताओं का जोर विपक्षी बीजेपी से लड़ने की बजाए आपस में लड़ने पर ही ज्यादा है। कांग्रेस की लड़ाई पर बीजेपी ने भी पैनी नजर रखी है। कांग्रेस के एक खेमे की सीएम वीरभद्र सिंह के खिलाफ सक्रियता देख उसने भी सीएम के खिलाफ आक्रामक तेवर अपना लिए हैं।

इस बीच, आधा दर्जन विधायकों के सीएम के हाईकमान को खिलाफ पत्र लिखने और उसके सार्वजनिक होने से कांग्रेस के भीतर लड़ाई अब और बढ़ने वाली है। ऐसे में सीएम को अब दो-दो मोर्चों पर एकसाथ जूझना पड़ेगा। एक तरफ उन्हें विपक्षी बीजेपी से लड़ना है और दूसरी तरफ पार्टी के भीतर उठ रहे या उठाए जा रहे असंतोष से लड़ना है। इन हालात में आने वाले दिन कांग्रेस के लिए सुखद नहीं हैं। 

बीजेपी भी हुई आक्रामक

विधानसभा चुनाव की घोषणा दो माह के भीतर कभी भी हो सकती है और इसे देखते हुए विपक्षी बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ हमलावर तेवर अपना रखे हैं। बीजेपी भी जानती है कि उनकी सत्ता में वापसी में केवल एक मात्र रोड़ा सीएम वीरभद्र सिंह हैं और इसे देखते हुए उनका पूरा आक्रमण केवल मात्र वीरभद्र सिंह पर ही है। वैसे भी बीजेपी वीरभद्र सिंह को छोड़ कांग्रेस में किसी और को कोई खतरा नहीं मानती। या यूं कहें कि कांग्रेस के भीतर किसी और इतना सशक्त नहीं मानती जो उनकी राह का रोड़ा बन सके। चाहे वह कोई मंत्री हो या फिर प्रदेश अध्यक्ष। इसलिए ही उनका सारा आक्रामण वीरभद्र सिंह पर ही केंद्रित है।

वीरभद्र औरसुक्खू के बीच बयानबाजी का खेल जारी

कांग्रेस के भीतर छटपटाहट वर्चस्व को लेकर है। सीएम वीरभद्र सिंह अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं तो उनके लिए इसमें चुनौती प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू पेश कर रहे हैं। यही कारण है कि वीरभद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह सु के बीच बयानबाजी का खेल भी चल रहा है। इस लड़ाई में कुछ कांग्रेस नेता अभी तटस्थ की भूमिका में भी हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई कहीं नहीं हो रही। इन हालात में वे भी मात्र दर्शक बन कर रह गए हैं।

इस बीच, कांग्रेस हाईकमान ने अब पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे को हिमाचल कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया है और उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती वीरभद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह के बीच जारी शीत युद्ध को समाप्त करवाना है, बल्कि चुनाव के मद्देनजर पार्टी को पटरी पर भी लाना है। लेकिन जिस तरह से इनके बीच शीत युद्ध जारी है, उससे लगता है कि यह युद्ध अभी थमने वाला नहीं है और इसकी गूंज दिल्ली दरबार तक जाने वाली है। ऐसे में शिंदे के प्रभारी बनते ही उनके राजनीतिक कौशल की परीक्षा शुरू हो गई है।

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