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पेपरमिंट के गुण जानकर हैरान रह जाएंगे आप 

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पिपरमिंट विश्व में यूरोप,एशिया,उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है । समस्त भारत में यह बाग़-बगीचों में विशेषतः उत्तर भारत तथा कश्मीर में लगाया जाता है । यह अत्यंत सुगन्धित पौधा होता है । इसके पुष्प बैंगनी, श्वेत अथवा गुलाबी रंग केहोते हैं । इसके फल चिकने अथवा खुरदुरे तथा बीज छोटे होते हैं ।  इसके औषधीय उपयोग निम्न हैं-
  • त्वचा पर हो रही लगातार खुजली से छुटकारा पाने के लिए आप पेट्रोलियम जैली के बजाय पेपरमिंट के तेल का उपयोग करें, क्योंकि इससे होने वाला असर पेट्रोलियम जैली की तुलना में काफी अच्छा होता है।
  • यदि आप प्राकृतिक रूप से काले घने लंबे बालों को पाना चाहती है तो इसके लिए पेपरमिंट के तेल का उपयोग किसी जादुई चमत्कार से कम नहीं है। इसका उपयोग करने से आपको काफी कम समय में ही अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
  • यदि हाथ धोने के लिए आपके पास सेनेटाइजर या हैंडवॉश का कोई साधन उपलब्ध नहीं है तो इस आपातस्थिति में  पेपरमिंट के तेल का उपयोग किया जा सकता है। इसके अंदर कई खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म करने की क्षमता होती है।
  • त्वचा को सुरक्षित करने के लिए भी आप पेपरमिंट के तेल का भी उपयोग कर सकती है। यह त्वचा को सूर्य की तेज किरणों से बचाने के लिए एक कवर की तरह काम करता है। 

  • अपने नाखूनों को सुंदर चमकदार बनाए रखने के लिए पेपरमिंट के तेल की मालिश नियमित रूप से करें। आपके नाखून स्वस्थ, सुंदर व चमकदार बन जाएंगे। दुनिया भर के सभी विशेषज्ञों ने मुंहासों के उपचार के लिए पेपरमिंट के तेल को सबसे अच्छा उपचार बताया है।
  • कभी-कभी तनाव होने के साथ सिर का दर्द काफी तेज से होने लगता है। ऐसे में पेपरमिंट के तेल की सुगंध हमारे दिमाग को शांत करने में एक अच्छी चिकित्सीय पद्धति के रूप में काम करती है।
  • पान में पिपरमिंट डालकर खाना भी कब्ज के रोग में लाभकारी होता है।
  • पिपरमिंट के तेल की शरीर में मालिश करने से ताजगी और खुशी का अनुभव होता है।

  • पिपरमिंट के थोड़े से दाने और एक टिकिया कपूर को किसी कपड़े में बांधकर बार-बार सूंघने से जुकाम में आराम आ जाता है। आंख और नाक से पानी निकलना भी बंद हो जायेगा और नाक से सांस लेने में भी आसानी होगी।
  • पिपरमिंट का फूल पानी या बताशे में डालकर खाने से पेट के दर्द में राहत होती है।
  • गठिया (घुटनों के दर्द) : सरसों के तेल में पिपरमेंट के तेल को मिलाकर लगाने से गठिया के रोगी के लिए लाभकारी होता है।
  • तीसी के तेल और तारपीन को बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा-सा कपूर और पिपरमिंट को डालकार मालिश करने से हाथ-पैरों की ऐंठन मिट जाती है।

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