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बच्चों को बेपरवाह नंगे पांव खेलने तो दीजिए

बड़े होने और उनके विकास में सहयोग करती है यह एक्सरसाइज

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नंगे पांव खेलना या चलना बच्चों के लिए ही नहीं, बड़ों के लिए भी फायदेमंद है। जरा याद करें कि कब आखिरी बार आपने अपने बच्चे को बिना जूतों की परवाह किए दौड़ते-भागते देखा था। दरअसल जो बच्चे नंगे पांव खेलते हैं, उन्हें कूदने और अपना संतुलन बनाने में आसानी होती है।

एक अध्ययन के अनुसार अगर बच्चों के विकास काल में लगभग 6 से 10 साल के बीच उन्हें नंगे पांव खेलने दिया जाए तो बाल्यकाल से किशोरावस्था तक वे कूदने, संतुलन बनाने तथा मांसपेशियों के बेहतर संचालन में कुशल हो जाते हैं। वे हर तरह की शारीरिक गतिविधियों में अन्य बच्चों से कहीं बेहतर होते हैं। किशोरावस्था के बाद भी उनका यह गुण बना रहता है।
इसलिए यह एक्सरसाइज बच्चों के बड़े होने और उनके विकास में सहयोग करती है। हर समय जूते पहनने से पैरों के स्वास्थ्य और उनके मूवमेंट पर भी असर पड़ता है । पांव भूमि पर होने से धरती और शरीर का संबंध जुड़ता है । बच्चा जब धरती पर चलता या भागता है तो पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति को भी समाहित कर लेता है और इससे उसकी संचालन शक्ति में भी बढ़ोतरी होती है ।
इतना ही नहीं ,त्वचा का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है इसलिए नंगे पांव चलने से बच्चे में संवेगात्मक विकास भी होता है। लगातार जूतों को पहनने से उसमें जर्म्स और फंगस भी पनप जाते हैं जो नुकसान करते हैं और कभी कभी बीमारियों का कारण भी बनते हैं।
नंगे पांव खेलने से बच्चे में सतर्कता और चैतन्यता बढ़ती है क्योंकि वे सीधे प्रकृति के संपर्क में आते हैं। उनकी निर्णयशक्ति बेहतर होती है । उनके पंजे और टखने मजबूत होते हैं और वे चोट खाने से बच जाते हैं । इसलिए बेहतर होगा कि बच्चों को प्रकृति के संपर्क में आने दिया जाए क्योंकि इसके लाभ उनके जीवन को भी संवारते हैं।

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