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ज्यादा उम्र के अफसरों को मोदी ने माना विकास में बाधक

दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'वी फॉर डेवलपमेंट' में बोले मोदी

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नई दिल्ली। विकास के मुद्दों को लेकर सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘वी फॉर डेवलपमेंट’ में बोलते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने ज्यादा उम्र के अफसरों को विकास में बाधक माना है। विकास के मुद्दे पर पिछड़े जिलों के 101 सांसदों व विधायकों से शनिवार को संसद के सेंट्रल हॉल में बातचीत करते हुए मोदी ने जिला में तैनात ज्यादा उम्र के अफसरों को विकास में बाधक माना और नौजवान अफसरों पर भरोसा जताया। सामाजिक न्याय पर बात करते हुए मोदी ने कहा, अगर सब बच्चों को शिक्षा मिलना सामाजिक न्याय की दिशा में एक कदम है, सभी घरों को बिजली मिलना सामाजिक न्याय की दिशा में एक और कदम है।

मोदी ने कहा कि, जब हम सामाजिक न्याय की बात करते हैं तो समाज की अवस्था तक सीमित रहते हैं। जब एक घर में बिजली है और बराबर वाले घर में बिजली नहीं है तो क्या ये जिम्मेदारी नहीं बनती कि वहां भी बिजली होनी चाहिए। अगर 5 जिलों का विकास हुआ है और तीन का विकास नहीं हुआ है तो इसका अर्थ ये है कि उन तीन को भी 5 के बराबर लाया जा सकता है।

पहला राष्ट्रीय सम्मेलन वुमैन लेजिस्लेटर्स: बिल्डिंग रिसर्जेट इंडिया थीम पर किया गया था आयोजित

अगर राज्य के कुछ जिले बहुत अच्छा कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि राज्य के अंदर पोटेंशियल है। हमें देश में बैकवर्ड की नहीं बल्कि फॉर्वर्ड की प्रतिस्पर्धा करनी है। पीएम मोदी ने कहा, संसाधन अगर दो जिलों के लिए या दो राज्यों के लिए बराबर हैं और फिर भी एक आगे है और दूसरा पीछे, तो इसका कारण संसाधन नहीं गवर्नेंस है। इसके अलावा लीडरशिप और इंपलीमेंटेशन आदि भी कारण हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि, आम तौर पर जिलाधिकारियों की औसत उम्र 30-35 होती है। वहीं 40-45 की उम्र के अफसर के पास कई चिंताएं होती हैं। स्टेट कैडर के प्रमोटी अफसर को ही अक्सर पिछड़े जिलों में भेजा जाता है। उन्होंने कहा, मैं इस बारे में मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर रहा हूं। बता दें कि, बीते वर्ष पहला राष्ट्रीय सम्मेलन वुमैन लेजिस्लेटर्स: बिल्डिंग रिसर्जेट इंडिया थीम पर आयोजित किया गया था।

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