टोपी की राजनीति : हरे पर Congress तो लाल पर BJP का रंग

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लेखराज धरटा/शिमला। चुनाव आते ही टोपी पर लगने वाली मखमली पट्टी के भी रंग बदल जाते हैं, जी हां एक कांग्रेस की तो दूसरी बीजेपी की। हरे और लाल रंग की टोपी को बीजेपी और कांग्रेस की निशानी कहा जाता है। बहरहाल, राजनीतिक रंगत ने हिमाचली संस्कृति और वेश भूषा को ही अब खतरे में डाल दिया है।

गौर रहे कि चुनाव नजदीक आते ही टोपियों पर भी राजनीति शुरू हो जाती है। हिमाचली ताज समझी जाने वाली टोपियों को भी समय के साथ राजनीति का शिकार होना पड़ा है। हिमाचल में टोपी अतिथि को सम्मान स्वरूप पहनाने की परंपरा है। टोपी में सामने आधे हिस्से में मखमल लगाने की परंपरा है ताकि सुंदर दिखे, लेकिन कुछ वर्षों से हरे मखमल की पट्टी वाली टोपी को कांग्रेस से जोड़ा जाने लगा है, जबकि लाल रंग की मखमल की पट्टी वाली टोपी को बीजेपी के पाले डाल दिया है। टोपी की राजनीति चुनाव के दौरान खूब गरमा जाती है।  इसके साथ ही चुनावी बेला में टोपी बनाने वालों की खूब मौज लग जाती है। उनका धंधा खूब चमकता है। जैसे ही चुनाव नतीजे आते है उसके बाद जिस पार्टी का प्रत्याक्षी जीत दर्ज करता है उस पार्टी से संबंधित टोपियों की मांग और बढ़ जाती है। लिहाजा कुछ वर्षों से शुरू हुई टोपियों की राजनीति ने पहाड़ी संस्कृति और वेशभूषा को ही खतरे में डाल दिया है। 

सिर के ताज ने बढ़ाई परेशानी

विशेष तौर से हिमाचल के कुल्लू, शिमला का रामपुर बुशहर क्षेत्र व जनजातीय ज़िला किन्नौर में टोपी अतिथियों को सम्मान स्वरूप पहनाने की परंपरा है। कोई भी विशेष मेहमान चाहे वह घर आया हो या किसी समारोह में, सिर पर टोपी पहना कर सम्मान दिया जाता है। अब जब से सिर के ताज हिमाचली टोपी को राजनीतिक रंग में बांट कर पेश किया जा रहा है, उसके बाद लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। अगर कोई व्यक्ति अतिथि को टोपी पहना कर सम्मान देना चाहता है तो इन परिस्थितियों में असंजस की स्थिति तैयार हो जाती है। उधर, चंद्रमोहन ने बताया वह टोपियां शॉल आदि बनाते हैं और बेचते हैं, आजकल इलेक्शन के दौर में टोपियां खूब बिक रही हैं, लेकिन कुछ वरिष्ठ नेता कोई हरी और कोई लाल पट्टी वाली टोपी पहनते हैं।

इससे लोगों में राजनीतिक रंग लग गया है कांग्रेसी हरी और बीजेपी लाल रंग की पट्टी वाली टोपी की डिमांड कर रहे हैं। वहीं, रतनदास कश्यप ने बताया आजकल चुनावों का दौर है और उनकी टोपियां खूब बिक रही हैं। उधर, लियो के पूर्व प्रधान शेर सिंह ने बताया कि पहले टोपी कोई भी पहन लो तो कोई फर्क नहीं पड़ता था, लेकिन अब टोपियों पर राजनीति शुरू हो गई है। अब हालात ऐसे हैं कि कोई रिश्तेदार या अतिथि आए तो कौन सी टोपी पहनाएं। 

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