अनारदाना….वात, पित्त, कफ का करे नाश

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अनार के सुखाए गए बीज को अनार दाना कहते हैं। दक्षिण हिमालय में उगने वाले दारू नामक अनार के जंगली विकल्प से बेहतरीन प्रकार के अनारदाना प्राप्त होते हैं। बीज सुखाते समय, थोड़ी बहुत मात्रा में अनार का गूदा रह जाता है इसलिए भारतीय पाकशैली में इन फल जैसे हल्के खट्टे मीठे स्वाद वाले, थोड़े चिपचिपे दानों का प्रयोग खट्टापन प्रदान करने के लिए किया जाता है। इनका प्रयोग अकसर सब्ज़ी और दाल आधारित व्यंजन के साथ-साथ मुगलाई व्यंजन में किया जाता है। भुने और पिसे हुए अनारदाना को नींबू के रस की जगह ऐसी जगह प्रयोग किया जाता है, जहां कुछ मौसमों में नींबू नहीं मिलता। भारतीय खाने में अनारदाना का प्रयोग खाने में खट्टपन प्रदान करने के लिए किया जाता है, जिसका प्रयोग इमली, कोकम या अमचूर की तरह किया जाता है।

  • इनके खट्टे मीठे स्वाद के साथ, यह सब्ज़ियों और छोले, दाल तड़का और आलू अनारदाना जैसे दाल आधारित व्यंजन में किया जाता है।
  • यूं तो अनार एक स्वादिष्ठ, पौष्टिक आहार है, लेकिन इसका उपयोग फल के रूप में कम व औषधि के रूप में अधिक किया जाता है। इसके पत्ते, जड़, छाल, फूल, बीज, फल के छिलके सभी उपयोगी होते हैं।

  • आयुर्वेद के अनुसार मीठा अनार वात, पित्त, कफ तीनों का नाश करता है। यह शीतल, तृप्तिकारक, प्यास, जलन, ज्वर, ह्दय रोग, कंठ रोग, मुख की दुर्गंध को भी दूर करता है। जबकि खट्टा-मीठा अनार भूख बढ़ाता है, रुचिकारी, हल्का व थोड़ा पित्तकारक होता है। खट्टा अनार खट्टे स्वाद का, वात, कफ को नाश करने वाला होता है।
  • यूनानी चिकित्सकों के अनुसार मीठा अनार पहले दर्जे का शीतल, स्निग्ध, हृदय और यकृत के लिए बलदायक, दाह शांत करने वाला, गले और छाती में मृदुता लाने वाला फल है। पत्तों की अपेक्षा गूदा, गूदे की अपेक्षा छाल, फूल की अपेक्षा कली और जड़ की छाल में अधिक औषधीय गुण होते हैं।

  • वैज्ञानिकों के अनुसार रासायनिक संगठन ज्ञात करने पर अनारदाना में आर्द्रता 78, कार्बोहाइड्रेट14.5, प्रोटीन 1.6, वसा 0.1 प्रतिशत होती है। इसके अलावा फास्फोरस, कैल्शियम, सोडियम, तांबा, मैगनेसियम, पोटेशियम, ओक्जेलिक अम्ल, लोहा, गंधक, टेनिन, शर्करा, विटामिन्स होते हैं। फल की छाल में 25 प्रतिशत, तने के गूदे में 25 प्रतिशत तक, पत्तियों में 11 प्रतिशत और जड़ की छाल में 28 प्रतिशत टैनिन होता है।

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