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ठेके पर सफाई : Shimla में MC के खिलाफ उठने लगे विरोध के स्वर

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पूर्व मेयर संजय चौहान बोले, सफाई व्यवस्था ठेके पर मंजूर नहीं

शिमला। राजधानी शिमला में सफाई व्यवस्था को ठेके पर देने का विरोध शुरु हो गया है। शहर में डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन के साथ-साथ सफाई व्यवस्था भी चौपट हो रही है और नगर निगम ने दो वार्ड में ट्रायल आधार पर सफाई व्यवस्था ठेके पर दी है। उधर, डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन की फीस बढ़ाने की कवायद पर भी विरोध शुरू हो गया है। उधर, माकपा ने इस पर कड़ा रोष जताते हुए बीजेपी शासित नगर निगम को आड़े हाथ लिया है। माकपा के राज्य सचिवालय सदस्य और पूर्व मेयर संजय चौहान ने कहा कि नगर निगम शिमला द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स कर ठेके पर देने का उनकी पार्टी कड़ा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि पूर्व नगर निगम ने राज्य सरकार को एक भेजा था, जिसमें सैहब सोसाइटी को नगर निगम में मर्ज कर सफ़ाई कर्मचारियों के रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग थी, लेकिन इस प्रस्ताव को सरकार ने अभी तक लागू नहीं किया है। उनका कहना था कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को लागू करे तो शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मांग को पूर्ण करे, ताकि सफाई व्यवस्था का कार्य ठीक हो सके।

नगर निगम के फैसलों में दिख रहा विरोधाभास

चौहान ने कहा कि अभी नगर निगम ने ट्रायल पर दो वार्ड ठेके पर दिए हैं और कुछ समय में बाकी भी देंगे। इसका उनकी पार्टी विरोध करती है और मांग करती है कि सैहब सोसायटी को सशक्त कर सारा कार्य इसके तहत रखे गए कर्मचारियों से करवाया जाए। उनका कहना था कि नगर निगम द्वारा लिए जा रहे फैसलों में विरोधाभास भी दिखाई दे रहा है। एक तरफ शहर की सफाई व्यवस्था के लिए पैसे बढ़ाने की बात कही जा रही है और कार्य ठेके पर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें बीजेपी शाशित नगर निगम की मंशा स्पष्ट रूप से उजागर होती है कि शहर की सफ़ाई को आउटसोर्स कर अपने चहेते ठेकेदारों को दे दो और पैसे बढ़ाकर शहर की जनता पर आर्थिक बोझ डाला जाए और अंत मे ठेकेदार को ही लाभ पहुंचाया जाए।
चौहान ने कहा कि सफाई व्यवस्था को ठीक करने में आउटसोर्सिंग या ठेकेदारी प्रथा कोई मदद नहीं कर सकती और न ही यह इसका कोई समाधान है। क्योंकि जब डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का कार्य 2010 में शिमला में आरंभ किया था तब तत्कालीन नगर निगम ने भी इसे आउटसोर्स कर निजी कंपनी को ठेके पर दिया गया था, लेकिन वह पूर्णतः विफल रहा था। उनकी मांग है कि सैहब सोसायटी को नगर निगम में मिलाया जाए और उसके कर्मचारियों से नगर निगम काम ले, तभी सफाई व्यवस्था को दुरूस्त किया जा सकता है।

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