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नियमित रक्तदान करने से याद्दाश्त अच्छी रहती है

Regular blood donation is good for memory

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रक्तदान एक तरह से किसी को दिया गया जीवनदान ही है। वैसे भले ही एहसास न हो पर इसका अंदाजा तब हमें लगता है जब हमारा कोई अपना खून के  लिए जिंदगी और मौत से लड़ रहा होता है। रक्त देने से जरूरतमंद का जीवन तो बचता ही है पर रक्तदाता को कोई नुकसान नहीं होता। वैसे तो देश भर में रेडक्रॉस जैसी संस्थाएं रक्तदानके प्रति जागरूकता फैला रही हैं पर ये सभी प्रयास तभी सफल होंगे जब हम स्वयं रक्त दान करने के लिए आगे आएं।
अमूमन हर साल भारत में 90 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है पर जमा मात्र 60 यूनिट ही हो पाता है। इसका मतलब यह हुआ कि खून के अभाव में हर साल सैकड़ों मरीज दम तोड़ देते हैं जबकि खून की एक यूनिट से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। रक्त की कमी को देखते हुए  विश्व भर में 14 जून को रक्तदान दिवस का आयोजन शुरू किया गया। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसकी आयु 18 से 68 वर्ष के बीच है और जिसका वजन 45 किलो से अधिक हो तथा रक्त में हिमोग्लोबिन 12 प्रतिशत से अधिक हो वह रक्त दान कर सकता है।
यह ध्यान देना भी आवश्यक है कि अगर कोई  कैंसर या अन्य किसी सांघातिक बीमारी से ग्रसित है तो वह रक्त नहीं दे सकता। अगर आप स्वस्थ हैं और नियमित रूप से रक्तदान करते हैं तो शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है। यह आपको हार्ट अटैक से दूर रखता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगों को कैंसर का खतरा भी नहीं होता। शायद आपको पता न हो कि रक्त देने से आप किसी की जान तो बचाते ही हैं साथ ही आप भी स्वस्थ रहते हैं।
एक वयस्क स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में 10 यूनिट खून होता है जिसमें से वह एक यूनिट खून (350 मिली) आराम से दे सकता है। तीन महीने बाद वह फिर रक्त दान कर सकता है। अगर आप नियमित रक्तदान करते हैं तो आपकी याद्दाश्त अच्छी रहती है और आप वृद्धावस्था में अल्जाइमर से बच जाते हैं। चाहे आप  शाकाहारी हों या मांसाहारी आप रक्तदान कर सकते हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है तथा सुई की हल्की चुभन से ज्यादा दर्द नहीं होता। एक बात और भी है कि जीवन में कितने दान किए जाएं पर रक्त दान महादान है। इसलिए आपको आगे आना ही चाहिए।
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