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भवनों के नियमितिकरण के मुद्दे पर मिले Jai Ram के समक्ष रखा पक्ष, आश्वासन लेकर लौटे

उप नगरीय जन कल्याण समन्वय समिति पहुंची जयराम के दरबार 

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शिमला। भवनों के नियमितिकरण को लेकर एनजीटी और प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद सक्रिय हुई उप नगरीय जन कल्याण समन्वय समिति आज सीएम जयराम ठाकुर और शहरी विकास मंत्री सरवीन चौधरी के दरबार पहुंची। समन्वय समिति के अध्यक्ष चन्द्रपाल मेहता और सचिव गोविन्द चतरान्टा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एनजीटी के फैसले के बाद पैदा हुई मुश्किलों और जटिलताओं को सीएम जयराम ठाकुर और शहरी विकास मंत्री सरवीन चौधरी के समक्ष रखा।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि भवनों के नियमितिकरण के लिए तय सैस और कम्पाउंडिंग फीस आम आदमी की क्षमता से परे है। समिति ने सीएम और शहरी विकास मंत्री से एकमुश्त राहत देने की गुहार लगाई और कहा कि आगे के लिए टीसीपी एक्ट को व्यवहारिक और सख्त बनाया जाए, ताकि भवन निर्माण करने के बाद किसी को कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और उनको भय में न जीना पड़े। समिति के अध्यक्ष चन्द्रपाल मेहता ने बताया कि एनजीटी का फैसला पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक बनावट को देखते हुए व्यावहारिक नहीं है। एनजीटी द्वारा लगाई गई शर्तों के मुताबिक प्रदेश में किसी भी तरह का निर्माण हो पाना संभव नहीं होगा।

टीसीपी के दायरे में आने वाले हजारों मकान प्रभावित होंगे

उधर, समिति के सचिव गोविन्द चतरान्टा ने बताया कि इस फैसले से टीसीपी के दायरे में आने वाले हजारों मकान प्रभावित होंगे। इसलिए जब तक सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिलती, समन्वय समिति की कोशिशें जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि सीएम ने प्रतिनिधिमण्डल को आश्वासन दिया कि सरकार अगले सप्ताह एनजीटी और उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।

सीएम ने कहा कि यह मामला बहुत समय से लम्बित है और सरकार इसका हल निकलने की इच्छुक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई फैसला आने तक सरकार सुनिश्चित करेगी कि जनता को कोई नुकसान न हो। प्रतिनिधिमण्डल में समन्वय समिति के उपाध्यक्ष कंवर भूपेन्द्र सिंह, कृष्ण गोपाल ठाकुर, एनसी शर्मा, सुभाष वर्मा, दौलत चौहान, सत्यवान पुंडीर सहित लगभग 100 भवन मालिक शामिल हुए।

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