कैरोलीन की कब्र पर कौन रख जाता है गुलदस्ता

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जर्मनी की इस किशोरी की बेहद खूबसूरत दिखने वाली कब्र एक रहस्य बन चुकी है। रोज कैरोलीन की बाईं बांह पर कौन गुलदस्ता रख जाता है इसका पता आज तक नहीं चला। कैरोलीन की मौत को करीब 150 साल बीत चुके हैं और उसकी कब्र पर ताजा फूलों का रखा जाना जारी है। यह वाक्या सन 1867 का है। जर्मनी की एक खूबसूरत किशोरी कैरोलीन वाल्टर थी। उसे उसकी बहन और परिवार वाले बहुत प्यार करते थे।

इसे दुर्भाग्य ही कहिए कि बचपन में ही कैरोलीन के माता-पिता की आकस्मिक मृत्यु हो गई। अब उनकी देखभाल के लिए कोई न था इसलिए दोनों बहनें दादी के पास रहने लगीं। वहां स्कूल में उसका नाम लिखा दिया गया और वह पढ़ने लगी सोलह साल में कैरोलीन एक पूर्ण सुंदर युवती हो चुकी थी। उसकी बहन सेल्मा का विवाह हो गया तो वह उसके साथ रहने चली गई। अचानक ही कैरोलीन को तपेदिक हो गया। उसका स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया और सत्रह वर्ष की होते-होते उसकी मौत हो गई। परिवार अत्यंत दुःखी था अपनी बहन की स्मृति को बनाए रखने के लिए सेल्मा ने एक दक्ष कलाकार से उसका बुत बनवाया। उस शिल्पी के हाथों में यह बुत और भी निखर कर सामने आया क्योंकि यह कैरोलीन की जीवन शैली और उसकी पसंद की झलक देता था। इस बुत में कैरोलीन बड़ी शांति से अपने बिस्तर पर सोई हुई थी। उसका एक हाथ उसके सीने पर था और दूसरे हाथ में किताब थी जैसे वह पढ़ते-पढ़ते ही सो गई हो।
यह बुत कौरोलीन की कब्र पर स्थापित कर दिया गया। उस पर लिखा गया- अपनी प्यारी बहन कैरोलीन की याद में उसकी बहन सेल्मा ने यह बुत बनवाया। निश्चय ही यह देवताओं का फैसला था तभी वह हमसे जुदा हो गई। उस दौर में यह कोई नई बात नहीं थी लोग अपने प्रियजन का ध्यान रखते हुए ऐसी कब्रें बनवाते थे। बाउंड्री के पास पेड़ों की घनी छांव के नीचे यह कब्र इतनी खूबसूरत लगती थी कि वहां आए लोग उसकी ओर खिंच जाते थे। अचानक इस कब्र के साथ एक रहस्य जुड़ गया । रोज उस कब्र पर कैरोलीन की बाईं बांह पर एक गुलदस्ता रखा हुआ दिखने लगा। सबसे पहले सेल्मा का ध्यान इस पर गया,उसने पता लगाने की कोशिश की पर कुछ पता नहीं चला। कब्रिस्तान के रखवाले भी कुछ नहीं बता पाए। कैरोलीन ने सेल्मा से कभी भी किसी युवा लड़के का जिक्र नहीं किया था। कहानियां फैलीं कि कैरोलीन का शिक्षक उसके प्रेम में पड़ गया था और वही गुलदस्ता रखता था। अगर यह बात मान ली जाए तो भी क्या वह अब तक जिंदा होगा ? अब तो करीब डेढ़ सौ साल बीत चुके हैं। अब तक लगभग 50 हजार गुलदस्ते कैरोलीन की कब्र पर रखे जा चुके हैं। आज की तारीख में कैरोलीन का सारा परिवार खत्म हो चुका है, जो उसे जानते थे वे भी मर चुके हैं पर फूलों का रखा जाना बंद नहीं हुआ है।

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