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शक्ति चक्र की ताकत को पहचानिए तो सही

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शक्ति चक्र के माध्यम से आंखों की चुंबकीय शक्ति को बढ़ाया जा सकता है । इसके अभ्यास के लिए एक ऐसा कमरा चुनना चाहिए जो कि एकांत में हो तथा जिसमें ताजी हवा तथा पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था हो। शक्ति चक्र पर अभ्यास केलिए किसी मोटे कागज पर शक्तिचक्र काली स्याही से बना लेना चाहिए और जहां बैठना है वहीं आंखों के ठीक सामने इस चक्र को टांग देना चाहिए तथा उसके सामने लगभग दो या तीन फीट की दूरी पर मोटे आसन पर साधक को बैठ जाना चाहिए। इसके पश्चात शक्ति चक्र पर अपनी आंखें स्थिर कर त्राटक का अभ्यास करना चाहिए। अभ्यास के लिए आसन पर बैठकर आपको शरीर पूरी तरह से ढीला छोड़ देना चाहिए। अपने आपको आपको ऐसा आभास देना चाहिए जैसे कि आप बहुत हल्के और समुद्र की लहरों पर बैठे हैं।

इस चक्र पर अभ्यास लगातार बिना आंख झपकाए एकटक करना चाहिए तथा साधक को हमेशा यह प्रयास करना चाहिए कि अधिक से अधिक जितनी देर तक देख सके उसे देखते रहना चाहिए तथा आंखों में पानी आने पर अभ्यास रोक देना चाहिए और दूसरे दिन पुनः प्रयास करना चाहिए। अभ्यास करते समय अपने दिल में यह धारणा हमेशा बलवती बनानी चाहिए कि मेरी आंखें सम्मोहन शक्ति से युक्त हो रही हैं तथा मेरा मस्तिष्क विचार शून्य हो रहा है कुछ समय तक जब शक्ति चक्र पर अभ्यास होगा तो कुछ समय के बाद यह शक्ति चक्र अपने स्थान से हिलता-डुलता हुआ नजर आएगा और यह ऊपर नीचे या दाएं-बाएं हिलता हुआ अनुभव होगा, तब साधक को चाहिए कि वह इस स्थिर दृष्टि से देखने की कोशिश करें और ऐसी कोशिश करें कि वह शक्ति चक्र एक ही स्थान पर स्थिर हो सके। कुछ समय पश्चात आगे चलकर साधक को शक्ति चक्र में कोई और तस्वीर दिखाई देने लग जाती है और जब ऐसा होने लगे तब आप समझ जाएं कि आप एकदम सही हैं।

यदि शक्ति चक्र पर अभ्यास करते हुए आपको एक चक्र के स्थान पर दो या तीन चक्र भी दिखाई देने लग जाते हैं तो इसे भी सफलता का ही चिन्ह मानना चाहिए तथा कई बार साधक को अभ्यास के दौरान इस शक्ति चक्र में डरावनी या सुंदर तस्वीरें भी दिखाई देने लगती हैं, लेकिन साधक को बराबर अभ्यास करते रहना चाहिए तथा मन में किसी भी प्रकार का अलग विचार नहीं लाना चाहिए। साधक को जब शक्ति चक्र पर अभ्यास करते-करते कुछ दिन हो जाए तब नए प्रकार का अभ्यास करें।

राह चलते चलते किसी आदमी की गर्दन पर अपनी नजर डालें और यह इच्छा करें कि वह पीछे मुड़कर आपको देखें। आपको यह देखकर और जानकर बहुत आश्चर्य हो जाएगा कि वह मुड़कर आपकी ओर देखने लगता है। शक्ति चक्र पर अभ्यास इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि साधक उन घटनाओं दृश्यों को भी देख सकने में सक्षम हो जाता है जो उसने पहले कभी नहीं देखीं। ये भूतकाल की घटनाएं भी हो सकती हैं तथा भविष्य काल की घटनाएं भी ।

जब शक्ति चक्र पर अभ्यास करते हुए अधिक समय हो जाता है तब साधक को अलग ही प्रकार के अनुभव होते हैं तथा उसे शक्ति चक्र के चारों ओर सुनहरी परत दिखाई देती है तथा धीरे-धीरे वह शक्ति चक्र को घेर लेती हैं तथा कुछ समय पश्चात पूरा शक्तिचक्र सुनहरे रंग की रोशनी में दिखाई देता है । अगर ऐसा दिखाई दे तो साधक को सोचना चाहिए कि उसकी आंखों में पर्याप्त रूप से तेज आ गया है, क्योंकि यह तेज शक्ति चक्र का नहीं है यह बल्कि यह तेज आपकी आंखों का ही है। जो कि आपको शक्ति चक्र के माध्यम से दिखाई देता है। इस समय तक आप सम्मोहन के क्षेत्र में काफी पहुंचे हुए माने जाएंगे तथा आप जिससे भी बात करेंगे वह आप से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेगा तथा जिसको चाहेंगे वह आपके लिए कार्य करने के लिए तत्पर रहेगा।

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