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जामुन का पेड़

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रात बड़े जोर का झक्कड़ चला। सेक्रेटेरियट के लॉन में जामुन का एक दरख्त गिर पड़ा। सुबह माली ने देखा कि उसके नीचे एक आदमी दबा पड़ा है। माली दौड़ा चपरासी के पास गया… और मिनटों में गिरे हुए दरख्त के नीचे दबे हुए आदमी के गिर्द मज़मा इकट्ठा हो गया।
-बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था… एक क्लर्क बोला।
-इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं। दूसरे ने कहा
-मैं फलों के मौसम में झोली भर कर ले जाता था मेरे बच्चे इसकी जामुनें बड़ी खुशी से खाते थे… तीसरे ने कहा।
-मगर वह आदमी…? माली ने दबे हुए आदमी की तरफ इशारा किया।
-हां यह आदमी, पता नहीं जिंदा है कि मर गया… एक चपरासी ने कहा।
-नहीं मैं जिंदा हूं। दबे हुए आदमी ने मुश्किल से कराहते हुए कहा। 
-जिंदा है, एक क्लर्क ने हैरानी से कहा।
-दरख्त को हटा कर इसे निकाल लेना चाहिए।
-मुश्किल मालूम होता है एक काहिल और मोटा चपरासी बोला दरख्त का तना बहुत भारी और वजनी है।
-क्या मुश्किल है। अगर सुपरिटेंडेंट साहब हुक्म दें तो अभी पंद्रह बीस माली, चपरासी और क्लर्क मिलकर दरख्त के नीचे से दबे आदमी को निकाल सकते हैं माली ने कहा।
-माली ठीक कहता है लगाओ जोर हम तैयार हैं। सबने कहा।
उसके बाद अफसरों के पास हादसे की फाइल चलती रही आधा दिन गुजर गया। दोपहर के खाने पर दबे हुए आदमी के गिर्द बहुत भीड़ हो गई। कुछ लोगों ने खुद ही दरख्त को हटाने की कोशिश की कि तभी सुपरिटेंडेंट भागता हुआ आया।
-हम लोग खुद यह दरख्त नहीं हटा सकते। यह दूसरे महकमे के अंदर आता है इसलिए मैं इस फाइल को अर्जेंट मार्क कर अगले महकमे में भेज देता हूं। वहां से जवाब आते ही इसे हटवा दिया जाएगा। वहां से भी फाइल वापस आ गई इस जवाब के साथ कि चूंकि यह एक फलदार पेड़ का मामला है इसलिए हम इसे हार्टिकल्चरल डिपार्टमेंट के हवाले कर रहे हैं।
रात को माली ने दबे हुए आदमी को दाल-भात खिलाया और कहा-तुम्हारी फाइल चल रही है उम्मीद है कल तक फैसला हो जाएगा। दबा हुआ आदमी कुछ न बोला।
-तुम्हारा कोई वारिस हो तो उसका अता-पता बताओ मैं उसे खबर देने की कोशिश करूंगा। माली ने फिर कहा।
-मैं लावारिस हूं। दबे हुए आदमी ने बड़ी मुश्किल से कहा। माली अफसोस जाहिर करते हुए चला गया।
हार्टीकल्चरल डिपार्टमेंट से जो जवाब आया वह भी हैरान कर देने वाला था। कहा गया था, कि हैरत है जब इस समय दरख्त लगाओ कि मुहिम चल रही है तो हमारे मुल्क में ऐसे अफसर मौजूद हैं, जो दरख्त काटने की बात कर रहे हैं वह भी एक फलदार दरख्त को। हमारा महकमा इसे काटने इजाजत नहीं दे सकता।
-अब क्या किया जाए…एक मनचले ने कहा अगर दरख्त नहीं काट सकते तो इस आदमी को ही काट कर निकाल लेते हैं।
रात को माली ने दबे हुए आदमी के मुंह में खिचड़ी खिलाते हुए कहा- अब मामला ऊपर चला गया है उम्मीद है सब काम ठीक हो जाएगा।
दबा हुआ आदमी आह भरकर आहिस्ते से बोला- हमने माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन, खाक हो जाएंगे हम तुम को खबर होने तक।
-क्या तुम शायर हो? माली ने मुंह में अंगुली दबाई। दबे हुए आदमी ने आहिस्ते से सिर हिला दिया।
यह बात फैली और दूर तक गई। शाम तक सेक्रेटेरियट का लॉन शायरों से भर गया। अब चूंकि दबा हुआ आदमी एक शायर था इस लिए फाइल कल्चरल डिपार्टमेंट को भेज दी गई, ताकि बेचारे शायर को इस मुसीबत से छुटकारा दिलाया जा सके। अकादमी का सेक्रेटरी बिना देर किए अपनी गाड़ी में वहां पहुंचा और दबे हुए आदमी का इंटरव्यू लेने लगा।
-तुम शायर हो… क्या तखल्लुस रखते हो?
-अक्स… दबे हुए आदमी ने जवाब दिया।
-अक्स…? सेक्रेटरी जोर से चीखा… क्या तुम वही हो जिसका कलाम-ए-अक्स हाल ही में छपा है। दबे हुए शायर ने हां में सिर हिलाया।
तुम हमारी अकादमी के मेंबर हो…?
-नहीं 
-हैरत है, इतना बड़ा शायर गुमनामी में दबा पड़ा है।
-गुमनामी में नहीं, दरख्त के नीचे दबा हुआ हूं… मुझे इस पेड़ के नीचे से निकालिए।
-अभी बंदोबस्त करता हूं। कह कर वह चला गया।
दूसरे दिन सेक्रेटरी भागा हुआ आया और बोला – मुबारक हो… मिठाई खिलाओ हमारी सरकारी अकादमी ने तुम्हें अपनी कमेटी का मेंबर चुन लिया है।
-पर मुझे पहले इसके नीचे से तो निकालो उसकी सांस बड़ी मुश्किल से चल रही थी।
-वह हम नहीं कर सकते हां अगर तुम मर जाओ तो तुम्हारी बीवी को वजीफा दिला सकते हैं।
-मैं अभी जिंदा हूं… मुझे जिंदा रखो।
हमारा महकमा सिर्फ कल्चर से ताल्लुक रखता है। इसके लिए हमने फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को लिखा है और अर्जेंट लिख दिया है।
दूसरे दिन जब फॉरेस्ट के आदमी आरी-कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे तो ऊपर से आदेश आ गया कि दरख्त न काटा जाए क्योंकि इसे पिटोनिया के प्रधानमंत्री ने लगाया था और इससे दोनों देशों के ताल्लुकात बिगड़ सकते थे।
-मगर एक आदमी की जिंदगी का सवाल है… एक क्लर्क चीखा। 
दूसरी तरफ दो हुकूमतों की दोस्ती का सवाल था। अंडर सेक्रेटरी ने कहा- आज वजीरे-आजम दौरे से वापस आ गए हैं। जो फैसला वह देंगे, सबको मंजूर होगा।
शाम पांच बजे सेक्रेटरी शायर की फाइल लेकर आया।
-सुनते हो तुम्हारी फाइल मुकम्मल हो गई है। वजीरे आजम ने दरख्त काटने का हुक्म दे दिया है कल यह दरख्त काट दिया जाएगा। उसने शायर का हाथ हिलाया, मगर उसका हाथ सर्द था, आंखों की पुतलियां बेजान हो चुकी थीं और चींटियों की एक लंबी कतार उसके मुंह में जा रही थी।
उसकी जिंदगी की फाइल भी मुकम्मल हो चुकी थी।
-कृशन चंदर 
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