परी के पंख

पिता की मौत के बाद घर में चंदन अकेला रह गया उसकी मां की मौत पहले ही हो चुकी थी। आखिरकार एक दिन चंदन ने गांव से बाहर जाकर कमाने का फैसला किया। वह एक ऐसे नगर में जा पहुंचा, जहां के लोग काफी अमीर थे। जल्दी ही उसे एक घर में नौकरी मिल गई जिसमें सिर्फ एक बूढ़ी औरत रहती थी जो उपने ही घर के बाहर एक छोटी सी दुकान चलाती थी। वह घर का सारा काम करता बाजार से घरेलू खरीददारी कर ले आता। वह खुश था क्योंकि उसे अच्छे पैसे मिलने लगे थे। बूढ़ी मां भी उसके काम से खुश थी तथा बेटे की तरह प्यार करती थी। एक बार वह तीर्थ यात्रा पर काशी जाने लगी। जाने से पहले उसने चंदन से कहा कि घर की पूरी देख भाल रखना और हां दक्षिण वाले कमरे में कभी मत जाना वैसे उसमें ताला बंद है पर मैं तुम्हारे अच्छे के लिए कह रही हूं।

pari-2बूढ़ी मां चली गई … दो चार दिन तो चंदन ने वैसे ही वक्त काटा पर उसके बाद उसका दिमाग उसी कमरे की तरफ चला गया। वह वहां गया। वह एक खाली कमरा था। हां, एक कोने में बांस की सीढ़ी रखी हुई थी। चंदन ने सीढ़ी पर चढ़ कर देखना चाहा कि यह किसलिए लगाई गई है। यह एक बाग तक जाती थी ऊपर पहपंच कर वह हैरान रह गया। वहां एक खूबसूरत सी झील थी जिसके चारों ओर पेड़ों की कतार थी लताएं फूलों से भरी थीं और पक्षी सुहाना गीत गा रहे थे। थोड़ी देर के लिए वह इस जादू में खो गया। तभी वह चौंक गया आसमान से हंसती-खिलखिलाती परियां झील के पानी में उतर आईं। उन्होंने अपने पंख उतार कर किनारे पर रखे और पानी से खेलने लगीं। वे बेहद सुंदर थीं। कुछ देर बाद वे जैसे आई थीं वैसे ही वापस चली गईं। अब उसका यह रोज का काम हो गया कि शाम के वक्त वह ऊपर जाकर एक पेड़ के पीछे छिप जाता और सारा तमाशा देखता रहता। कुछ दिनों बाद बूढ़ी मां का पत्र आया कि वह वापस नहीं आएगी उसका मन काशी में ही रम गया है इसलिए अब वही उस घर और दुकान का मालिक है। बहुत दिनों बाद चंदन ने दुकान खोली।

pari6उसी शाम जब वह ऊपर झील के पास गया तो वहां रखे एक परी के पंख उठा कर वहीं छिप गया। जब सभी परियों ने अपने पंख पहन लिए तो वह परी अपने पंख न पाकर घबरा गई। उसे रोता देख, खतरा भांप कर सारी परियां उसे छोड़ कर आसमान में उड़ गईं। बिना देर किए चंदन ने उसे पीछे से पकड़ लिया और लेकर सीढ़ियों से नीचे उतर आया। उसने उसके पंख आलमारी में छिपा दिए और अगले ही दिन पंडित बुला कर उससे शादी कर ली। सुंदर पत्नी पाकर वह खुश था। धीरे-धीरे उसका कारोबार बढ़ गया और वह सेठ कहा जाने लगा एक साल बाद उसके जुड़वां बच्चे हुए। पहले वह परी उदास रहती थी पर अपने बच्चों की वजह से खुश रहने लगी इसलिए चंदन भी उस पर भरोसा करने लगा। एक दिन चंदन ने कोई कागज लाने के लिए आलमारी की चाभी मुनीम को देकर भेजा। कहा कि सेठानी जी से कहना कि वह कागज देदें और आलमारी बंद कर चाबी वापस कर दें। आलमारी में कागज ढूंढते परी को अपने पंख दिख गए। उसने उन्हें निकाला, आलमारी बंद कर कागज और चाबी मुनीम को देकर भेज दिया। वह सोचती रही क्या वह उड़ना भूल गई होगी…। उसने पंख पहने और कमरे का एक चक्कर लगाया….उसने देखा वह उड़ सकती थी। फिर अपने दोनों बच्चों को कंधे पर बिठा कर आसमान में उड़ गई।

चंदन वापस आया तो उदास होकर रह गया …यह तो होना ही था आखिर उसने भी तो परी से छल किया था।

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