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बोलने वाली मैना

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इस बार जब पापा टूअर से लौटे तो पहाड़ी मैना लाए । जिस दिन मैना आई बच्चे बड़े खुश थे। उसके लिए एक सुंदर सा पिंजरा खरीदा गया, दाना -पानी की कटोरियां रखी गईं  उसके पैरों में चांदी के घुंघरू वाले छल्ले पहना दिए गए। बच्चे बड़ी देर तक उसके आस पास ही मंडराते रहे और उससे बातें करते रहे पर असली मुश्किल तीन दिन बाद शुरू हुई। घर के बाहर दूध वाले की आवाज आई राजू भाग कर पतीला लिए दूध लेने गया पर दूध वाला वहां नहीं था। वह तो एक घंटे बाद आया। दादी ने पंडित जी को कथा के लिए बुलवाया। वे तीन दिन पहले आए उन्होंने राजू को आवाज दी फिर घर में आए। चारपाई पर बैठ कर उन्होंने पूजा की सामग्री लिखवाई और चले गए । कथा का दिन संडे का तय हुआ । यह उसके दूसरे दिन की बात थी उस दिन कोई छुट्टी थी। राजू अपना होम वर्क पूरा करने में लगा था क्योंकि उसका क्रिकेट का मैच था और वह खेलने जाने से पहले काम खत्म कर लेना चाहता था। अचानक दरवाजे पर पंडित  जी की आवाज आई। वह चौंक गया । क्या कथा के लिए पंडित जी आए थे… ? पर आज तो शनिवार था वह दरवाजा खोलकर बाहर गया तो वहां कोई नहीं था।
 दादी की आदत थी कि सुबह सवेरे मोती को बड़े प्यार से पुकारती थीं – मोतिया उठ…
 उस रात मोती गहरी नींद में सो रहा था कि आधी रात को आवाज आई -मोतिया उठ …
– क्या दादी रात को भी सोने नहीं देतीं वह चिल्ला कर बोला।
-दादी यहां  कहां हैं बेटे वह तो अपने कमरे में सो रही हैं। तुमने कोई सपना देखा होगा सो जाओ। मां ने कहा और अपने कमरे में चली गईं।
हद तो तब हो गई जब बाहर पोस्टमैन की आवाज साफ सुनाई दी -चिट्ठी वाला । और उसके बाद पोस्ट मैन वहां नहीं था ।
घर के लोग थोड़ा हैरान से थे और सबसे ज्यादा तो बच्चे फिक्र में पड़ गए थे । आखिर यह हो क्या रहा था। आवाज तो आती थी पर आवाज देने वाला नहीं दिखाई देता था। संडे आया कथा हुई इस बीच मैना मजे से दाना पानी खा पी कर पिंजरे में मटकती रही और अपनी पाजेबें छनकाती रही।
उसी शाम पापा ने दरवाजे पर आवाज दी ।
-मोती देख पापा आए हैं… दरवाजा खोल दे मां ने कहा ।
-नहीं जाना मोती  पापा नहीं होंगे ये भी वैसे ही है फर्जी राजू ने कहा।
दोनों को नहीं उठते देख मां ने जाकर दरवाजा खोल दिया।
– तुम लोग दरवाजा खोलने क्यों नहीं आए…?
-हमने सोचा कि यह भी कोई झूठी आवाज है ।
कैसी झूठी आवाज ?
-एक हफ्ता हो गया कभी कोई मुझे आवाज लगाता है कभी मोती को । कभी पंडित जी की आवाज आती है और कभी पोस्ट मैन की और वहां कोई नहीं होता।
अचानक पापा जोर से हंस पड़े …वह तुम्हारी मैना है जो किसी भी आवाज की एक दम सटीक नकल करती है । इतना ही नहीं वह सवालों के जवाब भी देती है। वे पिंजरे के पास गए।
-हलो स्वीटी…उन्होंने कहा
-हाय हैंडसम— मैना ने जवाब दिया।
 ओह माय गॉड …बच्चों ने चैन की सांस ली । अब उन्हें एक और खेल मिल गया था । उनके पास बोलने वाली मैना जो थी।
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