अगस्त के फूल

बहुत पहले की बात है एक घर में एक प्यारी सी लड़की हिमानी अपनी दो सौतेली बहनों और सौतेली मां के साथ रहती थी। वे सब मिल कर उससे घर का सारा काम करवातीं। उसे ढंग के कपड़े भी नहीं देतीं और बचाखुचा खाना ही उसको खाने के लिए देती थीं। हिमानी अक्सर अपने मृत माता-पिता को याद करके रोती और किसी से कुछ नहीं कहती थी। फिर उन तीनों ने ऐसी योजना बनाई कि हिमानी को उस घर से हमेशा के लिए बाहर कर दिया जाए। एक शाम मां सिर पकड़ कर बैठ गई और कहा कि उसके सिर में भयानक दर्द है और यह तभी ठीक होगा जब अगस्त के फूलों का रस निकाल कर माथे पर लगाया जाए।

-अगस्त का फूल कहां मिलेगा… दोनों बेटियों ने तुरंत पूछा। यह भी उनकी योजना के मुताबिक ही था।

पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर अगस्त का पेड़ है उसी में अगस्त के फूल लगते हैं।
-वहां तक कौन जा पाएगा… कहकर दोनों बेटियों ने चुप्पी साध ली।

snow4मैं जाऊंगी मां तुम्हारा सिरदर्द ठीक होना जरूरी है …हिमानी ने कहा और जाने के लिए जरूरी सामान बांधने लगी।
वह सुबह तड़के ही घर से निकल गई। अब तीनों बहुत खुश थीं कि यह जनवरी का महीना है घनी बर्फ में वह ठंड से ही मर-खप जाएगी।
हालांकि हिमानी ने गर्म कपड़े पहने थे दिन भर तो वह आराम से आगे बढ़ती रही पर शाम होते ही मौसम खराब हो गया और बारिश शुरू हो गई। उसने एक चट्टान के नीचे रुक कर पनाह ली। वहीं लेटे-लेटे उसे गहरी नींद आ गई। सुबह जब उसकी आंख खुली तो वह आगे बढ़ी और चलती रही । शाम होने तक वह लगभग पहाड़ी के ऊपर पहुंच गई। ऊपर एक चौरस मैदान था जहां अगस्त के पेड़ के नीचे अलाव जल रहा था और उसके चारों ओर ग्यारह आदमी कुर्सियों पर बैठे हुए थे। बीच के सिंहासन पर एक आदमी राजा की तरह बैठा था उसके हाथ में सोने का दंड था। हिमानी को अपनी ओर आता देख कर वे चकित हो गए।
-इतने खराब मौसम में तुम यहां क्यों आईं बेटी… उनमें से एक ने पूछा।
-मेरी मां बीमार हैं। उनका कहना है कि अगस्त के फूल से उनकी बीमारी ठीक हो जाएगी, पर यह पेड़ तो एक दम खाली है इसमें कोई फूल नहीं।

-हां यह जनवरी का महीना है और फूल अगस्त में ही लगते हैं। हम बारहों महीने हैं और बारी -बारी से मौसम पर राज करते हैं, पर तुम्हारी मदद हम जरूर करेंगे। वह सिंहासन से उतर आया। उसने अपना चोगा अगस्त को पहनाया उसके सिर पर मुकुट रखा और उसे सिंहासन पर बिठा कर राज दंड थमा दिया। अगस्त ने जैसे ही राज दंड घुमाया मौसम बदल गया वह पेड़ अगस्त के फूलों से भर गया। हिमानी ने काफी फूल इकट्ठे कर लिए और वापस लौटने लगी।
– यह तुम्हारे लिए उपहार है उन्होंने दो बॉक्स सामने रख दिए इसमें से कोई एक ले लो। हम तुम्हें नीचे तक पहुंचा देंगे। 

snowहिमानी ने छोटा बॉक्स लिया और उनसे विदा लेकर चल पड़ी। उन लोगों ने स्लेज से उसे नीचे तक पहुंचा दिया ।वह घर के करीब पहुंची तो मौसम फिर बदल गया था। मां-बहनों ने उसे देख कर मुंह सिकोड़ा फिर फूल ले लिए। उसका बाक्स छीन कर उन्होंने खोला तो आंखें चौंधियां गईं अंदर हीरे- मोती भरे थे। उससे सारी कहानी सुनकर मां ने अपनी बड़ी बेटी को जबरदस्ती अगस्त के फूल लाने भेज दिया। वह भी बारह महीनों तक पहुंची। वे लोग अब तक सब कुछ समझ गए थे,पर उसकी भी उन लोगों ने मदद की और जाते समय दो संदूकें उसके सामने रखीं। उसने बड़ी वाली संदूक उठा ली और गिरती पड़ती घर पहुंची। मां ने खुश होकर संदूक खोला पर उसमें से सांप बिच्छू निकल कर पूरे घर में भर गए और उन तीनों को काट खाया। वे तीनों घर छोड़ कर भाग गईं । उसके बाद सारे सांप बिच्छू गायब हो गए। हिमानी उस घर में आराम से रहने लगी।

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