गुनगुन चिड़िया

0

राजू को जब बार-बार मां ने कहा कि वह चिड़ियों के लिए बारजे पर दाना पानी रख दिया करे, तो उसने इसे अपना नियम बना लिया। उसका अपना कमरा भी उसी के पास था जहां दोनों बर्तन रखे हुए थे । रोज सुबह जागने से पहले वह चिड़ियों की आवाजें सुनता और खुश हो जाता। चिड़िया दाना खातीं पानी पीतीं और उड़ जातीं। कुछ दिनों बाद राजू ने देखा कि एक बुलबुल उसकी खिड़की पर आकर बैठ जाती है और उसे पढ़ता हुआ देखती रहती है।
वह रविवार का दिन था राजू ने कुछ देर और सोने की सोची। वह चिड़ियों के शोर के बावजूद नहीं उठा । उसकी आंखें तब खुल गईं जब उसने अपनी खिड़की पर बैठी बुलबुल को देखा।
-गुड मार्निंग …गुनगुन तो आज आप मुझे जगाने आई हैं … वैसे यह काम तो मेरी मम्मी का है । वह हंसा और उठ कर बैठ गया।
चिड़िया ने पूंछ हिलाई… खुशी भरी आवाज निकाली और पंख फैला कर हवा में उड़ गई।
वक्त गुजरा राजू और गुनगुन की अच्छी दोस्ती हो गई । वह रोज आती, चिड़ियों के साथ दाना- पानी के बर्तनों पर सबके साथ जुटी रहती। पर वहां से उठ कर वह सीधी उसकी खिड़की पर चली आती। कुछ देर इधर -उधर टहलने के बाद उसके कमरे का एक पूरा चक्कर लगा कर बाहर निकल जाती । राजू भी उसके किसी दिन न आने पर बेचैन सा हो जाता था । इधर उसने पाया कि गुनगुन कुछ कम आने लगी थी। एक दिन वह कमरे से बाहर निकल आया । उसने देखा कि गुनगुन चोंच में तिनका लेकर सामने लॉन में चांदनी के पेड़ के पास जा रही थी । वह देखता रहा ..वह आती रही और तिनके उठा कर ले जाती रही ।
-तो यह बात है …गुनगुन अपना घोंसला बना रही है । जरूरी भी है …बारिश का मौसम आने वाला है आखिर उसे भी रहने को घर चाहिए।
चार ही दिन बाद बादल घिर आए राजू घबराया और उसने घर में रखी बरसाती उठाई और भाग कर लॉन में खड़े चांदनी के पेड़ पर पूरी तरह फैला दिया ।
-यह क्या कर रहे हो ? उसकी मम्मी ने पूछा ।
-यहां बुलबुल का घोंसला है वह भीग जाएगी।
– ओ हो तो चिड़ियों से दोस्ती…अच्छी बात है कहकर मम्मी अंदर चली गईं।
काफी वक्त गुजर गया राजू के मंथली टेस्ट थे। वह उनकी तैयारी कर रहा था, जब एक दोपहर अचानक गुनगुन आकर उसकी खिड़की पर बैठ गई। वह बार- बार उसकी ओर देखती और चीं चीं करती । उसकी आवाज में तकलीफ थी जैसे वह कुछ कहना चाह रही थी। राजू उठ कर बाहर निकल आया। गुनगुन उड़ती हुई लॉन की तरफ गई और चांदनी के पेड़ का चक्कर लगाने लगी। राजू ने देखा उसका घोंसला जमीन पर गिरा हुआ था । उसने तिनकों का वह छोटा सा घोंसला उठाया उसके नीचे दो नन्हे बच्चे थे । बड़े आहिस्ते से उसने बच्चों को घोंसले में रखा और वापस टहनियों में रख दिया।
अचानक गुनगुन उसके कंधों पर आकर बैठ गई ।
यह उसका थैंक्यू था।

You might also like More from author

Leave A Reply