सोने का हाथ

उस शाम जब बच्चे घर में ज्यादा ही उधम मचाने लगे तो नानी ने पारुल का हाथ पकड़ा और उसे अपने पास बैठा लिया।
-मैं तुम लोगों को एक अच्छी सी कहानी सुनाती हूं ।
कहानी का नाम सुन कर बच्चे भी नानी के आसपास सिमट गए।
नानी ने कहा-एक राज्य का राजा अपनी प्रजा का बड़ा ध्यान रखता था। उनके लिए हर चीज की व्यवस्था करने के बाद भी उसे चैन न आता था। उसके राज्य में चोरी नहीं होती थी इसलिए कोई भी अपने घर में ताला नहीं लगाता था। इसके बावजूद राजा रात को वेश बदल कर पूरे नगर में घूमता और पता करता कि उसकी प्रजा आराम से अपना जीवनयापन कर रही है या नहीं। एक दिन आधी रात को शहर में घूमते हुए राजा ने एक घर में रोशनी देखी। उसने घोड़े को दूर खड़ा किया और दबे पांव दरवाजे के बाहर से सुनने लगा कि अंदर क्या हो रहा है। वे एक ब्राह्मण पति-पत्नी थे जो तीर्थयात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे थे।

nani4चलने से पहले पति ने कहा- घर में ताला क्यों लगाना हमारा राजा बहुत अच्छा है उसके राज्य में चोरी नहीं होती। यह सुनकर राजा चुपचाप दूर अंधेरे में खिसक गया। वे लोग अपना सामान ले कर निकले तो सिर्फ घर की सांकल चढ़ा कर चले गए। राजा के लिए अब यह चिंता का विषय हो गया। वह रोज उस घर की रखवाली करने को जाने लगा। उसे डर था कि अगर चोरी हो ही गई तो उस पर सबका विश्वास हट जाएगा। साल बीतने को आया। राजा नित्य पहरेदारी करता रहा। साल के आखिरी दिन उसे उसी घर में फिर एक बार हलचल सी दिखी। अंदर रोशनी भी थी राजा ने सोचा जरूर चोर हैं जो उस घर में रखा सामान चुराने के लिए आए हैं। वह झोपड़ी के दरवाजे के पास गया और सांकल खटखटा दी।
-कौन है …अंदर से ब्राह्मण की आवाज आई। वे दोनों तीर्थ यात्रा से लौट चुके थे। राजा चुपके से अंधेरे में खिसक आया। अब उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। आगे कुछ न सोचकर उसने साथ लगते कई घरों की सांकलें खटका दीं और अपने महल को लौट गया। उस रात सभी लोग बाहर निकल कर इसी बात की चर्चा कर रहे थे कि रात को उनके दरवाजों पर न जाने कौन खटखटा गया। देर तक विचार-विमर्श के बाद तय हुआ कि इसकी शिकायत राजा से की जाए।

nani3सुबह दरबार लगा तो सारे इकट्ठे होकर राजा के पास गए और उन्होंने अपनी शिकायत कही।
-तुम्हारे हिसाब से इस अपराध का दंड क्या होना चाहिए ? राजा ने पूछा।
– उसका वही दाहिना हाथ काट देना चाहिए जिससे उसने हमारे दरवाजे खटखटाए। हम लोग रात भर परेशान रहे। सबने एक स्वर से कहा।
राजा ने तलवार उठा कर अपना दाहिना हाथ कोहनी पर से काट दिया। लोग हक्के-बक्के रह गए। इसके बाद राजा ने पूरी कहानी बताई। प्रजाजन बहुत दुखी थे और उन सबसे ज्यादा तो वह ब्राह्मण दुखी था जिसके घर की रखवाली के लिए यह सब हुआ।
राज वैद्य ने तुरत राजा की चिकित्सा की और पूरी प्रजा ने मिलकर राजा का वह हाथ सोने का बनवा दिया ।
अब वह सोने के हाथ वाला राजा था।
कहानी सुनकर बच्चे खुश होकर बाहर पार्क में भाग गए और नानी शाम की पूजा करने के लिए मंदिर में चली गईं।

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