बटरफ्लाई क्वीन…

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पूर्वा शरारती तो थी ही, पर उसके सवाल अक्सर लोगों को उलझन में डाल देते थे। कुछ दिनों बाद स्थितियां ऐसी बनीं कि घर के सभी लोग उससे कन्नी काटने लगे थे उनको लगने लगा था कि पूर्वा से उलझना समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं। पर पूर्वा को पापा से उलझना ज्यादा अच्छा लगता था क्योंकि वे उसकी बातों का सही जवाब देते थे। मौसम बारिश का था …पहले तो पूर्वा कागज की नाव बना कर छत में भरे पानी पर तैराती रही। फिर भाग कर अपनी छतरी ले कर आ गई। यह छोटी सी गुलाब के फूलों वाली छतरी उसके लिए पापा लाए थे। जैसे ही उसने छतरी खोली जरा सी देर में जाने कहां से ढेरों तितलियां आकर उसकी छतरी पर मंडराने लगीं।
-ओफ ओह इन तितलियों ने तो नाक में दम कर रखा है। अब इतनी बारिश में मैं बिना छाते के कैसे आंगन में चलूं।
-आजकल के मौसम में बारिश तो होगी ही…? उधर की तरफ आते हुए नौकर ने कहा।
-आजकल का मतलब…? पूर्वा उसकी ओर मुड़ गई।
-मुझे नहीं मालूम बिटिया रानी…जाकर अपने पापा से पूछो। कहकर वह अंदर चला गया।
पापा बरामदे में अखबार पढ़ रहे थे।
-पापा पहले तो यह बताइए कि जब भी मैं अपनी छतरी लेकर चलती हूं तो ढेरों तितलियां मेरी छतरी पर आकर बैठ जाती हैं। मैं ऐसे में छतरी लेकर चल भी नहीं सकती।
-तुम्हारी छतरी पर जो गुलाब के फूल बने हैं वे बिल्कुल असली जैसे लगते हैं इसलिए तितलियां उस पर आ जाती हैं।
-तो अब मैं क्या करूं?
-वे तुम्हें तंग तो नहीं करतीं न तो तुम उन्हें साथ लेकर चल सकती हो। पेंटिंग के फूलों पर असली तितलियां …अच्छा तो है।
-ग्रेट… पूर्वा ताली बजा कर हंस पड़ी। एक बात और भी है शंभू ने कहा कि आजकल बरसात का मौसम है। बताइए आजकल का मतलब क्या होता है?
-आज कल का मतलब जैसे कि कोई बात कल रही हो आज हो और कल भी रहे ।
– जैसे कि मैं कल थी आज हूं और कल भी रहूंगी।
-अरे नहीं, जैसे कि मौसम…जैसा कल था वैसा आज है और कल भी रहेगा।
-ओफ… ओह पापा यह तो बहुत दिनों की बात हो गई।
-तो इसे ऐसे समझ लो कि तुमने कल लौकी की सब्जी खाई थी आज भी खाओगी और कल भी।
-हां यह बात तो समझ में आ गई, पर मैं रोज लौकी क्यों खाऊंगी। वैसे भी मुझे अच्छी नहीं लगती।
-अच्छा अब जाओ और मुझे अखबार पढऩे दो। कहकर पापा फिर अखबार पढऩे लगे और पूर्वा अपनी छतरी लेकर घर के बाहर आ गई।
– सुनो-सुनो सब लोग आजकल का मतलब होता है जैसे कि आज भी लौकी खाओ और कल भी लौकी खाओ..।
पापा पूर्वा का यह ऐलान सुनकर चौंके उन्होंने बाहर झांक कर देखा। पूर्वा अपनी गुलाबी छतरी लिए बीच में खड़ी थी। बच्चों ने उसके चारों ओर घेरा बना रखा था वह छतरी को गोल-गोल घुमा रही थी और तितलियां उसके आसपास थीं।
-बटरफ्लाई क्वीन …एक बच्चे ने कहा।
-येस आई एम ए क्वीन…पूर्वा ने कहा और फिर छतरी घुमाने लगी। मौसम वैसा ही था बारिश की रिमझिम जारी थी। बारिश तितलियां… बच्चे और गुलाब के फूलों वाली छतरी भी इस मौसम में शामिल थी। -भारती
पापा पहले तो यह बताइए कि जब भी मैं अपनी छतरी लेकर चलती हूं तो ढेरों तितलियां मेरी छतरी पर आकर बैठ जाती हैं। मैं ऐसे में छतरी लेकर चल भी नहीं सकती।
-तुम्हारी छतरी पर जो गुलाब के फूल बने हैं वे बिल्कुल असली जैसे लगते हैं इसलिए तितलियां उस पर आ जाती हैं।
-तो अब मैं क्या करूं?
-वे तुम्हें तंग तो नहीं करतीं न, तो तुम उन्हें साथ लेकर चल सकती हो। पेंटिंग के फूलों पर असली तितलियां …अच्छा तो है..

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