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Illegal buildings गिराने के मामले में Govt जनता के सामने रखें अपना पक्ष 

Sudhir Sharma on Illegal buildings: सुधीर शर्मा ने High Court के आदेशों के बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल

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Sudhir Sharma on Illegal buildings: धर्मशाला। High Court के आदेश के बाद प्रदेश सरकार का क्या स्टैंड है, यह बात आम लोगों तक पहुंचनी चाहिए। पूर्व शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने धर्मशाला में यह बात उठाई है। Sudhir Sharma ने कहा कि प्रदेश में नगर नियोजन के नियमों को ताक पर रख कर बनाए गए भवनों को नियमित करने के लिए कांग्रेस सरकार के समय बनाए गए संशोधित कानून को रद करने के हाईकोर्ट के फैसले पर वर्तमान सरकार अपनी बात रखें। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अभी तक अगर वर्तमान प्रदेश सरकार High Court  के फैसले के खिलाफ Supreme court क्यों नहीं गई है, क्या सरकार प्रदेश के हजारों भवनों को गिरा देना चाहती है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में इसी तरह के High Court के फैसलों के खिलाफ सरकारे Supreme court गई हैं और उन्हें वहां से राहत मिली है। क्या इस मामले में प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट जा रही है, अथवा नहीं, जनता को अपना रूख स्पष्ट करें। Sudhir Sharma ने कहा कि नगर नियोजन विभाग के पास स्टाफ की भारी कमी होने के कारण ज्यादातर भवन निर्माणों में डिविएशन हुई है।

प्रदेश में नियमों के खिलाफ बने हैं 32 हजार भवन

भवन निर्माण के समय विभाग के संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के निर्माण स्थल पर न पहुंचने के कारण भवन मालिक अपनी ही जमीन पर नियमों के खिलाफ भवन निर्माण कर बैठे हैं। प्रदेश में ऐसे 32 हजार भवन हैं। कांग्रेस सरकार ने ऐसे हजारों भवन मालिकों को राहत देने के लिए विधानसभा में कानून में संशोधन किया। इसी साल 24 जनवरी को अधिसूचना जारी कर Himachal Pradesh Town and Country Planning (संशोधन) अधिनियम 2016 को राजपत्र में प्रकाशित किया और इस कानून को 15 जून 2016 से लागू माना गया और साथ ही इसे 24 जनवरी 2018 तक प्रभावी भी बनाया गया। Sudhir Sharma ने बताया कि इस कानून के तहत आए आवेदनों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना है। इसमें जैसा है, जहां है, वाली नीति को अपनाते हुए अवैध भवनों का नियमितीकरण होना है। इस कानून को ग्रीन व हेरिटेज क्षेत्रों में लागू नहीं किया गया। जो भवन इस कानून के तहत भी नियमितीकरण के पात्र नहीं होंगे, उनके बिजली-पानी के कनेक्शन काटने और उन्हें गिराने का प्रावधान भी इसमें बनाया गया है। सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार इस संसोधित कानून पर High Court के फैसले पर अपना पक्ष जनता के सामने रखे।

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