सूर्य के प्रकाश से संपर्क बनाए रखें

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हमारे घरों में सारे ही मंगल कार्य पूर्व की दिशा में मुंह कर किए जाते हैं। क्योंकि सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं और शीघ्र प्रत्यक्ष फल देते हैं। सूर्य पूर्व की ओर उदित होता है और ऐसा माना गया है कि उदित होता हुआ सूर्य सभी रोगों को नष्ट करता है। अगर बीमार नहीं रहना है तो सूर्य के प्रकाश से अपना संपर्क बनाए रखें। वास्तविकता यही है कि सूर्य के प्रकाश में रहना अमृतलोक में रहने के तुल्य है। सूर्य नारायण के साक्षात प्रतीक हैं इसीलिए वे सूर्य नारायण कहे जाते हैं। वे प्रत्यक्ष देवता हैं और जगत के नेत्र हैं । वे अकेले ऐसे देव हैं जिनकी उपासना से हमें प्रत्यक्षफल प्राप्त होता है। सूर्य की सात किरणों से अलग-अलग ऊर्जा प्राप्त होती है। इसी से धर्मिक अनुष्ठान सफल होते हैं। इस लिए सारे ही धार्मिक कृत्यों के लिए पूर्व की दिशा शुभ मानी गई है।

पूजा करते समय पूर्व दिशा की ओर ही मुंह

हमारे यहां जब भी कोई बड़ा पूजन पाठ करवाया जाता है तो कहा जाता है कि पूर्व की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। लेकिन केवल विशेष पूजा-पाठ के समय ही नहीं बल्कि हमेशा पूजा करते समय पूर्व दिशा की ओर ही मुंह रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ईशान कोण में बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पूजन करने से स्वर्ग में स्थान मिलता है क्योंकि उसी दिशा से सारी ऊर्जाएं घर में प्रवेश करती हैं।
वहीं पूर्व दिशा के अधिपति ग्रह सूर्य हैं तथा देवराज इंद्र का स्थान होने से यह निरंतर जय की दिशा कही गई है मान्यता है कि इस दिशा की ओर मुंह करके पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है बाद में ये ऊर्जाएं पूरे घर में फैल जाती हैं। पूर्व दिशा में बैठकर सुबह सूर्य की किरणों का सेवन करने से कई रोगों से मुक्ति मिल जाती है

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