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कॉफी नहीं चाय पीजिए जनाब

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आम तौर पर घर में बनने वाली चाय में से यदि दूध और शक्कर को हटा दिया जाए, तो यह चाय आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक होती है। शोध में यह बात सामने आई है कि कॉफी के मुकाबले चाय अधिक फायदेमंद होती है, क्योंकि इसे छानकर पिया जाता है, जिससे यह कम नुकसानदायक होती है।
सच यह है कि कॉफी को बगैर छाने पीने से उसमें मौजूद कैफीन हमारे स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। वहीं एक कप चाय में, एक कप कॉफी के मुकाबले लगभग आधी मात्रा में कैफीन होता है। एक कप कॉफी में कैफीन की मात्रा 100 मिलीग्राम होती है, जबकि 1 कप चाय में 50 मिलीग्राम ही पाई जाती है। इसीलिए एक कप कॉफी के मुकाबले एक कप चाय ज्यादा बेहतर विकल्प है। बगैर दूध और शक्कर की चाय को आम तौर पर काली चाय कहा जाता है, जो हृदय और पेट के लिए लाभदायक होती है। यह पाचन तंत्र की गड़बड़ी को भी काफी हद तक दूर कर देती है।
ग्रीन-टी के रूप  में चाय, तनाव कम करने से लेकर वजन कम करने में भी प्रभावकारी है। यही नहीं ग्रीन-टी, कैंसर से लड़ने में आपकी मदद करती है,और बढ़ती उम्र के असर को कम करने में भी सहायक होती है। इसके अलावा लेमन-टी के रूप में चाय का सेवन आपके शरीर से हानिकारक तत्वों को खत्म करता है, और ताजगी बनाए रखता है। नींबू में पाए जाने वाले विटामिन -सी का लाभ भी आपके शरीर को मिलता है। सुबह उठते ही एक प्याला बढ़िया चाय मिल जाए तो एक नया जोश, नई उमंग मिल जाती है। चाय पीने से हम तरोताजा तो महसूस करते ही हैं साथ ही आलस्य भाग जाता है।
नई चुस्ती-फुर्ती आ जाती है। वैसे चाय न सिर्फ सुबह की जरूरत है, वरन्‌ दिनभर में कभी भी पीने से यह हमें ताजगी से भर देती है। चाय न केवल एक पेय है, अपितु यह हमारे देश की संस्कृति का एक अंग है। घर आए मेहमान का स्वागत चाय पिलाकर करना हमारी सभ्यता में शुमार है। वैसे दुनियाभर में भारतीय चाय का कोई सानी नहीं है। भारत में चाय के बागान दुनियाभर में सबसे ज्यादा हैं। आसाम, नीलगिरि पर्वत, दार्जिलिंग आदि चाय के बगानों के लिए मशहूर हैं। चाय बनाने के कई तरीके हैं और हर प्रांत में चाय को बनाने की विधि अलग है। कश्मीर का कहवा हो या बिना दूध की नींबू वाली आइस्ड टी हो या फिर अदरक डालकर बनाई गई चाय हो। जो भी एक बार पीता है, बार-बार पीने का आदी हो जाता है।
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