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स्कूलों में Dress code: शहरी शिक्षकों से दो कदम आगे निकले ग्रामीण परिवेश के गुरुजी

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नाहन। शहर के चकाचौंध में रहने वाले शिक्षकों पर ड्रेस कोड भारी पड़ रहा है। ग्रामीण परिवेश के शिक्षकों से अपने आपको काफी एंडवास रखने वाले शहरी इलाकों की पाठशालाओं के गुरुजी अब तक ड्रेस कोड की शुरूआत तक नहीं कर पाए है। कई गुरुजी अब भी जींस व टी-शर्ट के मोह से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। बहरहाल, सिरमौर जिला के हरेक शहरी क्षेत्र में यह सब देखा जा सकता है। ऐसे में ग्रामीण परिवेश के स्कूल शहरी इलाकों में शिक्षा का पाठ पढ़ाने वाले गुरुओं के लिए सबक बनकर आगे निकल गए हैं। वर्तमान में सिरमौर जिला में ड्रेस कोड अपनाने वाले स्कूलों का आंकड़ा एक दर्जन के आसपास पहुंच चुका हैं। ये सभी स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा दुर्गम क्षेत्रों से ताल्लुक रखते है। मगर शहर के स्कूल इनके मुकाबले खाता भी नहीं खोल पाए हैं। नाहन, पांवटा साहिब के अलावा ददाहू, संगड़ाह, राजगढ़, शिलाई, कालाअंब आदि कस्बों के सरकारी स्कूल अभी तक सरकारी आदेशों पर खरे नहीं उतरे हैं। 

वहीं, शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे अधिकतर निजी स्कूल पिछले लंबे समय से अपने ड्रेस कोड को फॉलो करते आ रहे हैं। यह अलग बात है कि प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के नियम मान्यता प्राप्त निजी स्कूल तुरंत अपना लेते हैं, लेकिन कई सरकारी स्कूल सरकार से मोटा वेतन लेने के बाद भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

अंबोया, बांदली सहित ग्रामीण स्कूलों ने मारी बाजी

सिरमौर के अंबोया, बांदली ढाढस, देवामानल, जामना सहित कई ग्रामीण स्कूल ड्रेस कोड अपना चुके है। ड्रेस कोड अपनाने वालों में अंबोया सिरमौर जिला का पहला प्रथम सरकारी स्कूल बना। इसके अलावा दर्जन भर स्कूल ड्रेस अपना चुके है। उधर, सिरमौर के शिक्षा उपनिदेशक उच्च ने माना कि ग्रामीण परिवेश के स्कूल शहरी क्षेत्रों से आगे निकल गए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों को ड्रेस कोड अपनाने के निर्देश सख्ती से जारी किए गए हैं।  

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