एक हवा महकी सी

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फिर साढ़े सात बजे हैं, अचानक ही अनवर की नज़र आसमान पर चली गयी है। ठीक इसी वक्त रोज एक हवाई जहाज उसकी छत से हो कर गुजरता है। तब वह देर तक आसमान की ओर देखता रह जाता है, खाली आकाश उड़ते परिंदे और सर-सर करती हवा। उसे लगता है , कहीं पर वह बहुत अकेला पड़ गया है.. जैसे अचानक ही सब कुछ बदल गया हो, ममा, पापा, दोस्त और आस-पास की हवा, सभी कुछ।
बचपन, लगता है उससे बहुत दूर छूट गया है किसी खुशगवार मौसम की तरह। वह उसे सीने से लगाए रखना चाहता है, पर सब कुछ रेत की तरह हाथों से फिसलता जा रहा है। आँखों में है एक कोमल सा सपना , एक खूबसूरत सी लड़की का जो शाम को पांच बजे पुल पर से हो कर जाती है।
ग्रे पैंट चेक शर्ट। …टाई बांधते-बांधते उसकी निगाह शीशे पर चली जाती है। वह इस यूनिफॉर्म से आज़ाद हो जाना चाहता है, पर हैरान है अनवर कि उसकी छोटी से छोटी बात को समझ लेने वाली माँ यह क्यों नहीं समझ पा रहीं कि हमेशा के शरारती अनवर को चुप सी क्यों लग गयी है.. वह बाइक बाहर निकालता है, तौलिए से हाथ पोंछती ममा दरवाजे तक आती हैं। उनका विदा के तौर पर हिलता हाथ.। आँखों में स्नेह का भीगापन है। मोड़ पर पहुँच कर वह एक बार पीछे मुड़ कर देखता है फिर आगे बढ़ जाता है।
स्कूल की गहमा- गहमी , प्रेयर में उसकी आंखें बंद हैं पर मन कहीं खो गया है. . समझ में नहीं आता, यह उदासी सिर्फ उसी के हिस्से में क्यों आई है. . सीढ़ियों पर जाते वक्त उसे मिनी मिल जाती है।
-हे वाई आर यू लुकिंग सो सैड ?
-नथिंग,…. कह कर वह फीकी हंसी हंस देता है।
वह उसका हाथ पकड़ कर खींचती हुई क्लास में ले जाती है।
पीरियड ओवर होता है , लड़के शरारत से एक दूसरे को धकियाते हुए बाहर निकल जाते हैं। मिनी नहीं जाती वह रेलिंग से लग कर खड़ी है।
-अनवर टेल मी प्लीज, क्या हो गया है तुम्हें ?
-कुछ नहीं, कहा तो।
-देख तुझे मेरे सिर की कसम, सच बोल।
-मिनी हैव यू लव्ड एनी वन ? वह मुड़ कर सीधा सवाल कर बैठता है.…
. -नो नॉट एट ऑल , बट व्हाई ? वह उसकी आंखों में झांकती है, डू यू ?
-परहैप्स, आई थिंक सो। वह अनमना सा कह जाता है।
-कौन है, कैसी है ? उसकी आँखों में जिज्ञासा गहरी है…
– मैं उसके बारे में कुछ नहीं जानता, रोज पुल की तरफ से जाती है। शायद कहीं से ट्यूशन पढ़ कर आती है।
-बुद्धू कहीं के, मिनी उसके बालों को बिखेर देती है.. मैं आज उससे मिलती हूं।
– नहीं मिनी, ऐसा कुछ नहीं करना। उसकी आंखों में अनुनय है।
एक नियम सा हो गया है उसका , शाम पुल से लग कर खड़े रहना। रावी के बहाव का तेज शोर ढलते सूरज की पीली रोशनी से सजा आकाश, स्याह होती परछाइयां और उसका सामने से गुजर जाना। उस चेहरे का आकर्षण हैं उसकी झील सी आंखें जिन्होंने अनवर की नींद चुरा ली है। आज भी वह सामने से जा चुकी है उसका लेमन कलर का दुपट्टा जैसे बार-बार उसकी आंखों के सामने लहरा जाता है। यह कैसा एहसास है जिसने उसके सारे वज़ूद को हिला कर रख दिया है।
अगले दिन मिनी उसे कैंटीन में पकड़ लेती है। ठण्ड शुरू हो गई है , उन दोनों के बीच रखी चाय से उठती भाप जैसे धुंध की तरह जम गयी है।
-अनवर उस लड़की का ख्याल दिल से निकाल दो, वह हिन्दू है यह राह कहीं नहीं जाती और कहीं नहीं खत्म होती. ।
-तो तुम मेरी दोस्त कैसे हो ?
-दोस्ती की बात अलग है अनवर, पर प्यार … वह दूसरी ही बात है. . . मिनी उठ जाती है।
-मिनी प्लीज , क्या उसका नाम बता सकती हो ? अनवर को लगता है उसकी आंखें भर आई हैं. . .
– सौम्या नाम है उसका , घर में सिमी कहते हैं।
अनवर की दुनिया धीरे-धीरे सिमटती जा रही है। ममी समझ नहीं पा रहीं कि वह सारा वक्त रीडिंग रूम में क्यों गुजारने लगा है। भले ही उसने अपने आप को बहुत संभाला है पर यह आघात वह झेल नहीं पाता। पूरा एक हफ्ता गुजर चुका है बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा। उसके दोस्त चिंतित हैं … उदास। मिनी से बात सबको पता चल चुकी है। अनवर को सभी प्यार करते हैं , पर उसके दर्द की दवा कहां से लाएं।
अचानक ही एक दिन हर्ष उसके कमरे में दाखिल हो कर उसे बांहों में भर लेता है। उसके पीछे और भी दोस्त हैं। अनवर का सेलेक्शन एनडीए में हो गया है। उसका चेहरा पीला है पर बुखार उतर चुका है। दोस्तों से घिरे अनवर के होंठों पर कितने दिनों बाद मुस्कराहट आई है। शायद यही सच है जो उसका अपना है उसके दोस्त, उसका करियर , पर उसका दिल खाली-खाली सा क्यों लग रहा है?
मार्च का महीना है फिर भी ठण्ड है दो दिन से लगातार हो रही बारिश अचानक रुकी है और भीगे पहाड़ों पर बर्फ गिरने लगी है.. अनवर की तबीयत अभी पूरी तरह ठीक नहीं, उसे जाने में थोड़े ही दिन रह गए हैं.. वह जैकेट पहन कर बाहर आ गया है। ऊपरी पहाड़ियों पर जमी बर्फ देख कर उसके मन का सन्नाटा और गहरा हो जाता है …
वह आती है, आसमानी पुलोवर में उसका चेहरा और मासूम लगता है… वह सामने से गुजर जाती है और वह कुछ कह नहीं पाता। अनवर जानता है, उसे इस शहर से चले जाना है.। सब कुछ ख़त्म हो जाएगा। ये बर्फीले पहाड़, तेज बहती रावी सभी उससे दूर हो जाएंगे।
बर्फ ऊपर के पहाड़ों से नीचे उतरने लगी है। चारों ओर रुई के फाहों जैसी गिरती बर्फ में वह सर से पांव तक सफ़ेद हो चुका है। तभी धुंध में दूर से आती कोई आकृति दिखाई देती है। वह आकर उसके पास रुक जाती है। हैरान हो गया है वह सिमी को देख कर। उसने चेहरा उठाया है उसकी आंखों में आंसू हैं. ..
– क्यों खड़े हो इस बर्फ में ? अभी बीमारी से उठे हो। वह रो रही है और अनवर का दिल टुकड़े-टुकड़े होता जा रहा है.. चुप कराने की कोशिश में उसने सिमी को बांहों में समेट लिया है।
सिमी की आंखें बंद हैं ….
-तुम्हें किसने बताया सिमी ?
-मिनी ने, वर्ना तुम तो ज़िंदगी भर न कहते वह हंस देती है।
-शायद, पर एक बात तो है सिमी, इतनी बड़ी कायनात में ख़ुदा कहीं न कहीं जरूर है, इसका एतबार मुझे हो गया है।
गिरती बर्फ अनवर को अच्छी लग रही है। वह उसे लिए आगे बढ़ गया है. . . उसे लगता है , उसके आसपास की हवा महकने लगी है… एक बात उसके दिल में जरूर आई है ….
क्या प्यार जिंदगी का इतना जरूरी हिस्सा है ?

-प्रिया आनंद

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