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Valentine’s Day : प्रेम का संवाहक है क्यूपिड

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क्यूपिड प्राचीन रोमन देवताओं में से एक हैं। वह कामदेव की तरह प्रेम के देवता हैं। ये ज्यूपिटर और देवी वीनस के पुत्र माने जाते हैं। उनको एक पंख लगे बच्चे की तरह चित्रित किया जाता है, हाथ में धनुष होता है जिससे ये बाण छोड़कर मनुष्यों में प्रेम भाव जागृत करते हैं।

कहा जाता है कि क्यूपिड का बाण लगने पर मनुष्य जिससे भी सबसे पहले मिलता है उससे अत्यधिक प्रेम करने लगता है। इन्हें कहानियों में अत्यधिक चंचल, चपल और रसिक वर्णित किया जाता है। इनके तूणीर में दो तरह के बाण होते हैं – स्वर्णिम नोक वाले बाण जिनसे प्रेम जागृत होता है और सीसे की नोक वाले बाण जिनसे घृणा उत्पन्न होती है। अब क्यूपिड की मर्जी कि वे किस पर कौन सा तीर छोड़ते हैं।

तीसरी सदी में रोम पर राजा क्लैडियस का शासन था। एस समय प्लेग से एक दिन में 5000 लोगों की मौत हो गई। काफी संख्या में लोगों के मारे जाने के कारण रोमन सेना सैनिकों की कमी से जूझने लगी। राजा को और सैनिकों की जरूरत महसूस होने लगी। क्लैडियस का मानना था कि अविवाहित पुरुष अच्छी तरह से लड़ सकता है इसलिए उसने सेना में परंपरागत विवाह पर रोक लगा दी। उस वक्त रोम में संत वैलेंटाइन पादरी थे या मध्य इटली के टेरनी में बिशप थे। वह रोमन राजा क्लैडियस के आदेश के खिलाफ थे। उन्होंने गुप्त रूप से सैनिकों का विवाह कराना शुरू कर दिया। इस बात की जानकारी जब राजा को हुई तो उसने उनकी मौत का फरमान सुना दिया। संत वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर लिया गया। जब उनको मौत दी जानी थी उससे पहले जेलर ऑस्टेरियस ने उनसे अपनी नेत्रहीन बेटी के लिए प्रार्थना करने को कहा। संत वैलेंटाइन के प्रार्थना करने से ऐसा चमत्कार हुआ कि उसकी बेटी की आंखों की रोशनी आ गई और वह देखने लगी। इससे प्रभावित होकर जेलर ने ईसाई धर्म अपना लिया।

14 फरवरी 269 में संत वैलेंटाइन को मौत के घाट उतार दिया गया। फिर 496 ई. में पोप ग्लेसियस ने 14 फरवरी को सेंट वैलेंटाइन्स डे घोषित कर दिया। समाज के लोगों के बीच आपसी प्यार व सद्भाव की कामना से शुरू हुआ वैलेनटाइन अब मुख्य रूप से प्रेमी जोड़ों के प्यार के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा है। भारत में भी बीते दो दशकों से वैलेंटाइन्स डे मनाने का प्रचलन काफी बढ़ गया है। भारतीय युवा वैलेंटाइन्स डे को धूमधाम से मनाने लगे हैं। युवा जोड़े एक-दूसरे को वैलेंटाइन कार्ड से लेकर तरह-तरह के महंगे उपहार देने लगे। इस तरह देखें तो संत वेलेंटाइन का प्रयास शतप्रतिशत सफल रहा और उनकी मत्यु का दिन प्रेम पर्व बन गया।

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