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होटल-रेस्तरां में कैफेटेरिया पश्चिम या दक्षिण दिशा में हो तो अच्छा

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वर्तमान समय में होटल व्यवसाय में काफी तेजी से प्रगति हुई है। होटल, रेस्तरां या रिसोर्ट का उपयोग शहरी जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुका है। रेस्टोरेंट, मनोरंजन व उपार्जन तथा भोजन रेस्टोरेंट उद्योगों की स्थापना से सरल वास्तु के होटलों के लिए वास्तु संकल्पना का इस्तेमाल करके `अतिथि देवो भव’ की प्राचीन भारतीय आतिथ्य संस्कृति से आसानी से मिला सकते हैं। वास्तुशास्त्र के मुताबिक होटल का निर्माण इस तरीके से किया जाना चाहिए कि, इसकी ऊंचाई दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर अधिक ऊंची हो और उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ से इसकी ऊंचाई कम हो। होटल बनाने के लिए भूमि का भाग चौकोर और सिंहमुखी हो तो यह वास्तुशास्त्र के अनुसार अच्छा माना जाता है। बड़े होटल में मीटिंग हॉल बनाना हो तो उत्तर-पश्चिम दिशा सर्वश्रेष्ठ रहेगी। होटल का उत्तर-पूर्व क्षेत्र बालकनी के रूप में प्रयुक्त करें और पश्चिम-दक्षिणी दिशा का भाग आवास हेतु कमरे बना सकते हैं, जिसमें आगन्तुक रह सकते हैं।

होटल में यात्रियों को ठहरने के लिए बनाए गए कमरे पश्चिम और दक्षिण दिशा की ओर होने चाहिए। कमरे का द्वार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु नियमों के अनुसार कमरों के अंदर शौचालय, स्नान घर, पलंग टीवी आदि आवासीय भवन के शयन कक्ष के अनुरूप होना चाहिए। होटल एवं रेस्तरां के किचन दक्षिण पूर्व दिशा में और भोजन कक्ष भूमितल पर दक्षिण या पश्चिम में बनाना उचित माना जाता है। वास्तु की दृष्टि से होटल एवं रेस्टोरेन्ट में खान-पाने का कक्ष या कैफेटेरिया पश्चिम या दक्षिण दिशा में होना आवश्यक है। होटल का स्वागत कक्ष या रिसेप्शन प्रवेशद्वार के नजदीक पश्चिम या दक्षिण में इस प्रकार बनाएं ताकि स्वागतकर्ता का मुंह उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ हो। भोजन पकाने के लिए पाकशाला या रसोई पूर्व-दक्षिण अर्थात आग्नेय कोण में होनी चाहिए।

जलपान गृह या होटल हेतु बालकनी सदैव उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। खाद्य पदार्थ के भण्डारण या स्टोर हेतु सदैव दक्षिण और पश्चिम या द0-प0 अर्थात नैत्रृत्य कोण दिशा का उपयोग करें। शौचालय व स्नानागृह को उत्तर-पश्चिम में बनाएं। एयर कंडीशनर पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। विद्युत, जनरेटर, ट्रांसफार्मर को आग्नेय दिशा में रखें। वाश-बेसिन पश्चिम दिशा में हो तो ठीक होगा। मुख्यद्वार पूर्व, उत्तर या उत्तर पूर्व में रखें ।दक्षिण दिशा में मुख्यद्वार नहीं होना चाहिए। कैश बाक्स सदैव उत्तर दिशा में ही रखें। स्विमिंग पुल तालाब आदि पूर्व या उत्तर में ही होना चाहिए। होटल का उत्तर-पूर्व दिशा का क्षेत्र खाली रखने का प्रयास करें या फिर वहां स्वागत कक्ष बनाएं। होटल के उत्तर-पूर्व क्षेत्र में कमरों का निर्माण नहीं करना चाहिए। इस ओर बालकनी बना सकते हैं। मुख्य भवन के चारों ओर खाली स्थान रखें। उत्तर-पूर्व क्षेत्र में पश्चिम-दक्षिण क्षेत्र की अपेक्षा अधिक स्थान खुला रखना चाहिए।

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