नया वर्ष, नए अरमान, नए लक्ष्य…WELCOME नववर्ष

0

मानव इतिहास की सबसे पुरानी पर्व परम्पराओं में से एक नववर्ष है। इतिहास के गर्त में झांकें तो प्राचीन बेबिलोनियन लोग अनुमानतः 4000 वर्ष पूर्व से ही नववर्ष मनाते रहे हैं, नववर्ष के आरम्भ का स्वागत करने की मानव प्रवृत्ति उस आनन्द की अनुभूति से जुड़ी हुई है जो बारिश की पहली फुहार के स्पर्श पर, प्रथम पल्लव के जन्म पर, नव प्रभात के स्वागतार्थ पक्षी के प्रथम गान पर या फिर हिम शैल से जन्मी नन्हीं जलधारा की संगीत तरंगों से प्रस्फुटित होती है। विभिन्न विश्व संस्कृतियां इसे अपनी-अपनी कैलेण्डर प्रणाली के अनुसार मनाती हैं। वस्तुतः मानवीय सभ्यता के आरम्भ से ही मनुष्य ऐसे क्षणों की खोज करता रहा है, जहां वह सभी दुख, कष्ट व जीवन के तनाव को भूल सके। इसी के अनुरूप क्षितिज पर उत्सवों और त्योहारों की बहुरंगी झांकियां चलती रहती हैं।

new-year6नववर्ष आज पूरे विश्व में एक समृद्धशाली पर्व का रूप अख्तियार कर चुका है। इस पर्व पर पूजा-अर्चना के अलावा उल्लास और उमंग से भरकर परिजनों व मित्रों से मुलाकात कर उन्हें बधाई देने की परम्परा दुनिया भर में है। अब हर मौके पर ग्रीटिंग कार्ड भेजने का चलन एक स्वस्थ परंपरा बन गयी है पर पहला ग्रीटिंग कार्ड भेजा था 1843 में हेनरी कोल ने। आज तमाम संस्थाएं इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करती हैं । हर साल की तरह 2016 भी जाने को तैयार है, ताकि नया साल नई उम्मीदों, नए सपनों और नई उलब्धियों को जगह दे सके। यह साल जाते हुए यह याद दिलाता है कि इस बीते साल ने हमसे क्या छीना और क्या दिया। कब-कब हंसाया …आशान्वित किया और कब हमें निराशा की गहरी खाई में धकेल दिया। हर नव वर्ष पर हम दोगुने उत्साह के साथ नए वर्ष में प्रवेश करते हैं। पर इस उल्लास के बीच ही यही समय होता है जब हम जीवन में कुछ अच्छा करने का संकल्प लें, सामाजिक बुराइयों को दूर करने हेतु दृढ़ संकल्प लें और मानवता की राह में कुछ अच्छे कदम और बढ़ायें। सर्व शक्तिमान ईश्वर से हमारी यही प्रार्थना है कि इस नव वर्ष में यह शताब्दी अपने 17 वें वर्ष में प्रवेश करेगी। यह वर्ष आपके लिए खास बने। नया वर्ष, नए अरमान, नए लक्ष्य, नए सपने के साथ नये सुनहरे भविष्य की शुरुआत बने।

You might also like More from author

Leave A Reply