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शिशु को देंगे ये सब तो आएगी अच्छी नींद 

शिशु के स्टैंडर्ड आहार की समय सारिणी में थोड़ा बदलाव  करें 

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मां और बच्चे का रिश्ता खास होता है। खास तौर पर शिशु की देखभाल के लिए मां क्या कुछ नहीं करती। उसके आहार से लेकर उसकी नींद तक के बारे में मां को पूरा ध्यान रखना पड़ता है। जब बच्चा रात को जागता है और साथ में माता-पिता भी जागते हैं भले ही वे कितने ही थके हुए क्यों न हों। ऐसे में एक अध्ययन सुखद सूचना की तरह आया है। इसके अनुसार शिशु के स्टैंडर्ड आहार की समय सारिणी में थोड़ा बदलाव कर दिया जाए तो वह अच्छी नींद लेता है।
कहने का अर्थ यह कि 6 महीने तक ब्रेस्टफीड की जगह अगर ठोस आहार जल्दी देना शुरू कर दिया जाए तो उन्हें अच्छी नींद आती है और निद्राजनित समस्याएं भी कम होती हैं। सुरक्षित नींद के लिए  शिशु को पेट के बल सुलाने की जगह पीठ के बल लिटाना ज्यादा भी बेहतर माना गया है।
लंदन में क्लीनिकल ट्रॉयल के तौर पर महिलाओं के दो ग्रुप्स को शामिल किया गया। एक ग्रुप को 6 महीने तक शिशु को ब्रेस्टफीड पर ही रखने को कहा गया और दूसरे ग्रुप को कहा गया कि वे बच्चों को तीन महीने बाद ठोस आहार दे सकती हैं। परिणाम चौंकाने वाला था । जिन शिशुओं ने ठोस आहार लिया वे देर तक अच्छी नींद लेकर सोए।
उनके मुकाबले वे बच्चे जो सिर्फ ब्रेस्टफीड पर थे कम सोए और यह फर्क 6 महीनों के अंतराल में बढ़ता गया। ठोस आहार लेने वाले हर रात ज्यादा देर तक सोए और रात में उनके जागने का क्रम भी कम रहा। वैसे शिशु की नींद इस बात पर भी निर्भर करती है कि प्रेग्नेंसी के दौरान मां का स्वास्थ्य कैसा रहा। इसलिए भी मां को भी प्रेग्नेंसी के समय में अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि उसका शिशु स्वस्थ रहे।
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