मानसिक स्वास्थ्य : तनाव से रहना होगा दूर

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आज के दौर में हम लोगों की जिंदगी कैसी है इस पर ध्यान देना जरूरी है। हर एक मिनट का हिसाब रखती भाग-दौड़ भरी जीवन शैली में सबसे बड़ी और लगातार उभरती हुई समस्या है मानसिक अस्वस्थता। यह हर व्यक्ति के जीवन में स्थाई रूप से पैर पसार चुकी है। निजी जिंदगी से शुरू होने वाला तनाव अब पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन चुका है।

हालात यह बने हैं कि लोग मानसिक शांति पाने के लिए योग, ध्यान अध्यात्म आदि का सहारा लेने लगे हैं। आज की लाइफ स्टाइल इतनी बदल चुकी है कि इससे उपजी परेशानियों को देखते हुए अब 10 अक्टूबर को पूरे विश्व में मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाने लगा है ताकि लोगों को इसकी गंभीरता के प्रति जागरूक किया जा सके। यह बात हर किसी को समझना चाहिए कि तनाव किसी भी समस्या का हल नहीं होता बल्कि यह कई शारीरिक परेशानियां भी पैदा कर देता है।

दुनिया में सबसे अधिक हार्टअटैक का कारण मानसिक तनाव ही है इसलिए जरूरी है कि तनाव पैदा करने वाले कारणों से दूर ही रहें। ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं क्या आपको अंदाजा है कि हिमाचल में आत्महत्या का ग्राफ अचानक ही क्यों बढ़ गया है? दरसल लोग जिंदगी की कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता खो बैठे हैं। हमें यह जानना जरूरी है कि वे कौन से तरीके हैं जिन्हें अपनाकर हम अपनी इच्छाशक्ति और मानसिक क्षमता बढ़ा सकते हैं।

एक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति समुदाय और समाज में अच्छा योगदान दे सकता है। आंकड़ों के के अनुसार इस समय 45 करोड़ लोग मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि 2020 तक अवसाद (डिप्रेशन) पूरे विश्व में दूसरे सबसे बड़े रोग भार का कारण बनेगा। अच्छा हो कि हम किसी भी बात का तनाव लेने की जगह हम ठंडे दिमाग से समस्या का समाधान करने की सोचें। अगर आपको लगता है कि आप डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं तो उसके लिए कुछ नियम बना लीजिए।

समझदारी से समय पर भोजन करना पर्याप्त नींद लेना और नशे से दूर रहना इसकी मुख्य शर्तें हैं। बेरोजगारी, बिखरे परिवार और नशे की आदत मुख्य रूप से मानसिक अस्वस्थता के कारण हैं। लंबे चलने वाले रोग भी अवसाद के जोखिम को बढ़ाते हैं। मुश्किल यह है कि ऐसे लोगों को परिवार में कोई गंभीरता से नहीं लेता तथा गैरसरकारी संगठन भी इसे कठिन क्षेत्र मानते हैं। अकसर शारीरिक दुर्व्यवहार, घरेलू हिंसा तथा डराने-धमकाने से गुजरा बचपन तनावग्रस्त बनाते हैं। जरूरी है कि इससे बचने के लिए मन को मजबूत बनाएं और विपरीत स्थितियों को नहीं कहना सीखें तो निश्चय ही इस खतरे से बच सकेंगे।

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