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आस्था : चमत्कारी खीर को लेकर लगा भक्तों का तांता

आस्था : चमत्कारी खीर को लेकर लगा भक्तों का तांता

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लंबलू के शनिदेव मंदिर में सदियों से ठीक हो रहे दमा, खांसी, अस्थमा, पुरानी एलर्जी के मरीज

ए सिंह/हमीरपुर। बेशक साइंस बुलंदियों को छू रही हो, लेकिन आस्था अभी भी बकरार है। हमीरपुर के लबलू में प्रसिद्ध शनिदेव मंदिर एक ओर जहां आस्था का केंद्र है, वहीं यहां वर्षों पुराने रोग भी चुटकियों में दूर हो रहे हैं। जी हां शरद पूर्णिमा के अवसर पर चमत्कारी खीर का सेवन करने से दमा, खांसी, अस्थमा, पुरानी एलर्जी की बीमारी से तुरंत निजात मिलती है। उत्तर भारत के प्रसिद्ध शनिदेव मंदिर लंबलू में आयुर्वेदिक खीर में मिली दवाई खाने के लिए साल भर लोग इंतजार करते है और यही कारण है कि आज शरद पूर्णिमा के बाद खीर का सेवन करने के लिए सुबह तड़के से ही मंदिर में भीड़ जमा हो गई।
खीर खाने के लिए पूरे हिमाचल समेत बाहरी राज्यों से भी लोग आज के दिन मंदिर में पहुंचते हैं। शनिदेव मंदिर लंबलू में हर साल की भांति इस बार भी शरद पूर्णिमा की रात्रि को बनाई गई खीर में दवाई मिलाकर सेवन करवाई गई, हर साल ही चमत्कारी खीर खाने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं और बीमारी से निजात पाते है। गौरतलब है कि मंदिर में पिछले बीस साल से इस तरह शरद पूर्णिमा के बाद दमा, खांसी, एलर्जी के मरीजों को दवाई निशुल्क खिलाई जाती है और इस दवाई का सेवन करने के तुरंत बाद लाभ मिलना शुरू होता है। यही कारण है कि हर साल शरद पूर्णिमा के अगले दिन मंदिर में सैकड़ों की तादाद में मरीज पहुंचते हैं।

दमा रोगियों के लिए रामबाण है चमत्कारी खीर

माना जाता है कि दमा रोगियों के लिए तो यह खीर रामबाण का काम करती है, क्योंकि पौराणिक गाथों के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन बनाई गई खीर का अपना महत्व है और खीर को बनाकर पूरी रात भर चांद की रोशनी में रखा जाता है व जो ओंस इस खीर पर आकर पड़ती है वह काफी लाभकारी मानी जाती है। बाद में खीर में जड़ी बूटियों से बनाई गई औषधीय दवाई मिलाई जाती है। मंदिर परिसर में हिमाचल के कोने-कोने से मरीजों के अलावा, अंबाला, पंजाब, चड़ीगढ़ से भी मरीज पहुंचे है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ त्रिलोक शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात को खीर रात भर चांद की रोशनी में रखी जाती है और दूसरे दिन सुबह से ही खीर में दवाई मिलाकर मरीजों को खिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले बीस साल से दवाई मरीजों को दी जा रही है और इसे खाने से काफी हद तक स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

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