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ऐसे करें वशीकरण साधना…

ऐसे करें वशीकरण साधना…

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वशीकरण सम्मोहन का ही दूसरा रूप है, लेकिन इसकी घनात्मकता अधिक है और प्रभाव भी ज्यादा होता है। इससे व्यक्ति पूरी तरह वश में हो जाता है और इच्छानुसार कार्य करता है। रोचक यह है कि वशीकरण की साधना जितनी जटिल मानी जाती है तंत्र साधना द्वारा यह उतनी ही सरल हो जाती है। यह मानव मन की सूक्ष्म तरंगों पर आधारित विलक्षण क्रिया है। जब भी कोई साधक इस साधना में सफलता पा लेता है तो उसके व्यक्तित्व में अद्भुत विलक्षणता आ जाती है। वशीकरण के लिए तांत्रिक अनुष्ठान पूर्वकाल में भी किए जाते रहे हैं। यदि आज भी यह साधना श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए तो निश्चय ही सफलता मिलती है। कुछ भी ऐसा सीखने से पहले एक संकल्प ले लेना चाहिए कि जो भी तंत्र कर्म किया जाए वह जनकल्याण की भावना से ही किया जाना चाहिए।
शाबर मंत्र जल्दी सिद्ध भी हो जाते हैं और सटीक वार करते हैं। नीचे लिखे मंत्र को एकांत कमरे में बैठ कर इकतीस दिन में हर दिन 324 बार जप कर सिद्ध करें…

ऊँ नमो आदेश गुरु को राजा मोहू, प्रजा मोहू, मोहू ब्राह्मण, बनिया
हनुमंत रूप में जगत मोहू तो राम चंद्र मणि मणियां
गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
मंत्र सिद्ध करने के बाद किसी चौराहे पर जाएं उस चौराहे की मिट्टी लेकर सात बार अभिमंत्रित कर ललाट पर तिलक करें। जो भी देखेगा वशीभूत होगा।

vashikaranमुस्लिम पद्धति से भी वशीकरण का प्रावधान है…
निम्नलिखित मंत्र को कागज पर लिख कर इसे इत्र, गुलाब के फूल तथादीपक के आगे रख कर लोबान की धूनी दें फिर उसकी बत्ती बनाकर सरसों के तेल में दीपक की तरह जलाएं फिर 700 बार इसी मंत्र का जप करें। रोज 21 दिनों तक यह प्रयोग दोहराएं। इसके बाद जिस भी इच्छित व्यक्ति का नाम लिया जाएगा वह वश में हो जाएगा। हालांकि इस तरह के सैकड़ों प्रयोग हैं पर इसलिए भी उन्हें गोपनीय रखा गया है ताकि इस शक्ति का दुरुपयोग न होने पाए।

मंत्र- या इस्माईल बिहिक्क या तोय या ताहिरो फलां को फलां के बस में करो।
इसमें जिसे जिसके वश में करना है उसका नाम रखें।

लौंग मोहिनी मंत्र
ऊं नमः आदेश गुरु का
लौंग-लौंग तू मेरा भाई, तुम्हारी शक्ति चलाई
पहली लौंग राती-बाती दूजी लौंग जीवन माती
तीजी लौंग अंग में राखे चौथी लौंग दुई कर जोड़े
चारो लौंग जो मेरी खाय, अमुक झट मेरे पास आय
आदेश देवी कामरू कामाख्या की दुहाई फिरै।

उपर्युक्त मंत्र से चार लौंग सात बार अभिमंत्रित कर जिस व्यक्ति को भी खिलाई जाए, वह मोहित हो जाता है। इसके सफल प्रयोग के लिए पहले इस मंत्र को सिद्ध कर लेना जरूरी होता है। सिद्धि के लिए साधना रविवार से आरंभ करें और दीपक जलाकर निरंतर 21 दिन तक नित्य प्रति 21 मंत्रों का जप करें। इस साधना में कोई व्यवधान न हो इतना ध्यान रखना चाहिए।

vashikaran-3षटकर्म और उनकी देवियां
तंत्र से स्तंभन, मोहन, मारण, वशीकरण, विद्वेषण तथा उच्चाटन का साधन किया जाता है। इसके अंतर्गत छह कर्म होते हैं और उनकी अधिष्ठात्री देवियां यह क्रिया संपन्न करने में सहायक होती हैं।

  • शांतिकरण कर्म- रोग का निवारण, ग्रहों की शांति और शुभत्व के लिए किए गए कार्य को शांतिकरण कहते हैं। शांतिकर्म की अधिष्ठात्री देवी रति है।
  • वशीकरण -मनुष्य, पशु और जीवमात्र को अपने वश में करने को वशीकरण कहते हैं। वशीकरण की अधिष्ठात्री शक्ति सरस्वती हैं।
  • स्तंभन-चलते हुए को रोकना ही स्तंभन है। इस कर्म की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी हैं।
    विद्वेषण कर्म- दो व्यक्तियों में अत्यंत मित्रता हो उनमें वैर पैदा करना, प्रेम -प्रीति को समाप्त कर देना ही विद्वेषण कहा जाता है। इसकी अधिष्ठात्री शक्ति ज्येष्ठा है।
  • उच्चाटन कर्म- स्वदेश से निकल कर कहीं और चले जाने को उच्चाटन कहते हैं। इसका मुख्य अभिप्राय ही अपने स्थान पर रहने वाले को वहां से पृथक कर हटा देना है। इस कर्म की अधिष्ठात्री शक्ति दुर्गा हैं।
  • मारण- इसे एक तरह से वर्जित कार्य माना गया है। फिर भी मनुष्य द्वारा पशु, पक्षी, जलचर, नभचर जीवों के प्राण लेना ही मारण कहा जाता है। मारण कर्म की अधिष्ठात्री देवी भद्रकाली है। साधक को जैसा कर्म करना हो उसी की शक्ति का पूजन करने से कार्य में सफलता मिलती है।

शांतिकर्म हेमंत ऋतु में, वशीकरण वसंत ऋतु में, स्तंभन कर्म शिशिर ऋतु में, उच्चाटन वर्षा ऋतु में, विद्वेषण ग्रीष्म ऋतु में और मारण कर्म के लिए शरद ऋतु का प्रावधान किया गया है।
किसी भी कर्म में पूजा में काम आने वाले फूल भोग, दीपक की बत्ती का रंग कर्म की प्रवृत्ति के अनुसार ही किया जाता है।
शांतिकर्म में श्वेत वस्तुएं प्रयोग करें। वशीकरण में लाल रंग की वस्तुओं का चयन करें। स्तंभन कर्म में पीले रंग की वस्तुएं प्रयोग में लाई जाती हैं। विद्वेषण में लाल रंग की सामग्री का प्रयोग कीजिए। उच्चाटन में धुएं के रंग की वस्तुए प्रयोग करें। मारण में फूल से लेकर बत्ती तक सभी वस्तुएं काले रंग की प्रयोग की जाती हैं।

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