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क्यों कुंभ मेला है इतना खास, जानिए इससे जुड़ीं कुछ रोचक बातें

क्यों कुंभ मेला है इतना खास, जानिए इससे जुड़ीं कुछ रोचक बातें

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विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले यानी कुंभ का साक्षी बनने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भारी तादाद में लोग पहुंचते हैं। संगम के तट पर आस्था का मेला सजा गया है और तीर्थयात्रियों का हुजूम उमड़ गया है। कुंभ मेले की भव्यता को समझना तब भी आसान नहीं होता जब आप वहां मौजूद हों। कुंभ को समझने और देखने के लिए कई बार यहां आना पड़ता है। हर एक छोटी चीज न केवल कुंभ के किसी आयोजन या नियमों से बंधी होती है बल्कि यहां आने से पहले कुछ बातों को जानना भी जरूरी है। कुंभ मेले की हर बात रोचक लगती है। यही नहीं कुछ बातें आपको आश्चर्य में भी डाल सकती हैं। कुंभ मेले में न केवल साधु-संत बल्कि आम लोग और विदेशी भी पहुंचते हैं। ये विदेशी लोग कुंभ स्नान के लिए यहां आते हैं। यही नहीं पिछले कुछ सालों में यहां कुछ नए अखाड़े भी बने हैं। हम आज कुंभ के बारे में कुछ रोचक बातें आपको बताने जा रहे हैं जो शायद आप नहीं जानते होंगे …


कुंभ का प्रमुख आकर्षण साधु-संतों के 13 अखाड़े होते हैं। हालांकि अब इसमें दो अखाड़े और आ गए हैं। ये अखाड़े हैं किन्नर अखाड़ा और महिला नागा साधुओं का अखाड़ा है।


इन अखाड़ों के साधु-संत कुंभ की प्रमुख तिथियों के दिन पूरी शानों शौकत के साथ शाही स्नान करने निकलते हैं। शाही स्नान के लिए प्रशासन अखाड़ों से संगम तक संतों के लिए एक विशेष राजपथ बनाता है, जिस पर सिर्फ और सिर्फ अखाड़े चल सकते हैं।

प्रयागराज के संगम तट से लेकर कई सौ किलोमीटर तक यहां भक्तों के रहने के लिए टेंट बनाए जाते हैं। अगर ये कहें की संगम पर कुछ समय के लिए एक अस्थाई शहर बस जाता है कोई अचरज की बात नहीं होगी।

मान्यता है कि कुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के न केवल पाप खत्म होते हैं बल्कि उसे मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। देवलोक में जानके का रास्ता कुंभ स्नान से जुड़ा है।

कुंभ मेला में बनने वाले अस्थाई शहर से तकरीबन 70 लाख से अधिक लोगों को कमाई का अवसर देता है। यहां छोटे से बड़े हर तरह के व्यवसाय होते हैं। पूरे 50 दिन ही नहीं बल्कि इससे पहले और कुंभ खत्म होने के बाद तक लोगों को रोजगार यहां मिलता है।

कुंभ का पहला स्नान साधु संन्यासी करते है। इसे शाही स्नान कहते हैं इसके बाद ही आम लोगों को स्नान करने की अनुमति मिलती है। शाही स्नान भोर 3 बजे से शुरू होता है।

साल 2016 के कुंभ में 120 मिलियन से ज्यादा लोग कुंभ में आए थे। इस दौरान पूरे इलाहाबाद शहर में पब्लिक का दबाव बढ़ जाता है क्योंकि कई लोग अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां भी आ कर ठहरते हैं।

कुंभ मेले को मैनेज करना दुनिया के सबसे मुश्किल मैनेजमेंट में से एक है। यहां सुरक्षा से लेकर हर तरह की व्यवस्था चाक चौबंद मिलती है।

कुंभ मेले को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया है।

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