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जन्मकुंडली में क्या है?

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हिंदुओं का विश्वास है कि संचित एवं प्रारब्ध कर्मों का ही फल मनुष्य भुगतता हैं। यदि संसार पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि कुछ मनुष्य द्रव्यादि से इतना परिपूर्ण हैं कि उन्हें द्रव्य नहीं रहने के दुखः का किंचित मात्र भी अनुभव नहीं और साथ ही यह भी पता चलता है कि कुछ लोगों को एक समय के भोजन का भी प्रबंध नहीं है। कोई तो शरीर से हृष्ट पुष्ट है और कोई रोगग्रस्त हो कर कष्ट भोग रहा है।

kundli-3किसी के नेत्र अति सुन्दर और कोई नेत्र विहीन भटकता फिरता है। क्या इस विचित्र लीला को देखने के बाद यह प्रश्न नहीं उठता है कि एक मनुष्य क्यों राजा और दूसरा क्यों रंक? एक शरीर से क्यों सुखी दूसरा क्यों दुखी? यह सर्वस्वीकृत है कि ईश्वर न्यायकारी है। यदि ईश्वर का यह गुण ठीक है तो फिर संसार में सुख-दुख की ऐसी विभिन्नता क्यों? तात्पर्य यह है कि यह बात स्वयं सिद्व हो जाती है कि मनुष्य अपने पूर्वजन्म के पाप-पुण्य फल को भोगता है। जन्मकुंडली मनुष्य के पूर्वजन्म के कर्मों का मूर्तिमान स्वरूप है। पूर्वजन्म के कर्मों के जानने की कुंजी है। विस्तृत वस्तु केवल संकेतों में व्यक्त है। गागर में सागर भरा है। जिस तरह विशाल वटवृक्ष का समावेष उसके बीज में है उसी तरह मनुष्य के पूर्वजन्म जन्मान्तर का कृतकर्म जन्म कुंडली में अंकित है।

kundliज्योतिर्विदों के लिए कुंडली पूर्वजन्म कृत्य कर्मों की मूर्ति व गाथा है। पूर्वजन्म की रहस्यमयी घटनाओं की सांकेतिक अभिव्यक्ति है। सूचनात्मक चिन्ह विशेष है। विद्वानों ने दिव्यदृष्टि द्वारा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के इस जन्म के भोग्याभोग को बतलाया है। अंग्रेजी भाषा में इसकी व्याख्या इस प्रकार हैः Horoscope is only a chart of the past actions symbolically expressed.

कैप्टन लेखराज शर्मा एमए,पीएचडी,ज्योति-नवजयाचार्य (स्वर्णपदक)
शारदा ज्योति-नुवजया निकेतन, जोगिन्द्र नगर।

9816435961

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