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ये क्या! बच्चों के लिए कीड़े वाले बिस्कुट

ये क्या! बच्चों के लिए कीड़े वाले बिस्कुट

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गफूर खान/धर्मशाला। नौनिहालों को कुपोषण से बचाने के लिए दी जाने वाली खाद्य सामग्री ही अगर खराब हो तो फिर देश के भविष्य का क्या होगा। यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। ऐसा ही एक मामला चैतडू (बगली) में स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र में सामने आया है। पौष्टिक आहार के नाम पर इस आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को जो बिस्कुट दिए गए, उनमें कीड़े पड़े हुए थे। बच्चे जब घर पहुंचे तो उनके परिजनों ने उन्हें पैक खोलकर बिस्कुट दिए। लेकिन, बिस्कुट देखकर बच्चों के परिजन भी स्तब्ध रह गए। इन बिस्कुट में कीड़े  थे। जब पैक की जांच की गई तो इसपर न तो बनाने की और न ही एक्सपाइरी की तारीख अंकित थी।

  • biskut1आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को दे दिए बिस्कुट के पैक पर न तो बनाने की और न ही एक्सपाइरी डेट
  • किसी बच्चे के अभिवावकों ने फेसबुक पर पोस्ट की इन बिस्कुट की फोटो

ऐसे ही बिस्कुट प्राप्त करने वाले किसी बच्चे के अभिवावकों ने फेसबुक पर इन बिस्कुट की तस्वीर पोस्ट की है और साथ ही सवाल पूछा है कि क्या देश के भविष्य के लिए कीड़ों वाले बिस्कुट ही बचे हैं। इन बिस्कुटों के खाने से अगर कोई बच्चा बीमार पड़ता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। हालांकि, अभिभावकों ने आंगनबाड़ी केंद्रों में अपने ही जान-पहचान वालों के होने के चलते मामले को आला अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इन कीड़े लगे हुए बिस्कुटों की फोटो को जरूर शेयर कर दिया है। इस बारे में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी तिलक राज आचार्य ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में खाद्य सामग्री सिविल सप्लाई विभाग से पहुंचती है।

school-kidsविभाग के पास पहुंची सामग्री की पूरी जांच सीडीपीओ द्वारा की जाती है। लेकिन, यदि इस तरह का कोई मामला है तो इसकी जांच की जाएगी तथा इस पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में घटिया व इस तरह का सामान मिल रहा है तो अभिभावक विभाग के पास शिकायत कर सकते हैं। अब विभाग जांच का रोना भले ही रो ले, लेकिन यह सरासर लापरवाही का मामला है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा है। देखना यह है कि जांच के बाद विभाग किसके खिलाफ क्या कार्रवाई अमल में लाता है। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए भी विभाग को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है

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