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`राजा’ के रण में उतरेंगे `युवराज’ !

`राजा’ के रण में उतरेंगे `युवराज’ !

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शिमला। प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह अपने पिता और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के चुनाव क्षेत्र शिमला ग्रामीण से राजनीतिक करियर का आगाज कर सकते हैं। इसका सीधा सा कारण उनका यहां के लोगों से लगातार संपर्क बनाए रखना है। मुख्यमंत्री की सरपरस्ती में वह यहां का सारा काम भी देख हैं और यहां के लोगों की नब्ज को भी भांप रहे हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने ओकओवर में शिमला ग्रामीण के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक में गर्मजोशी से लोगों का मनोबल बढ़ाया। यह समीकरण, आज यूथ कांग्रेस अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह के उस ऐलान से उभरे हैं जिसमें उन्होंने अगली राजनीतिक पारी खेलने के लिए तैयार होने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने अभी पूरे पत्ते नहीं खोले हैं।

vir-2विक्रमादित्य सिंह के मुताबिक वे अगला विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, लेकिन किस हलके से लड़ेंगे, इसका खुलासा वे अभी नहीं कर रहे हैं। विधानसभा सीट का मामला पार्टी हाईकमान पर छोड़ कर वे खुद को इस मामले से अभी दूर रख रहे हैं। विक्रमादित्य सिंह ने आज मीडिया से बातचीत में कहा कि वे किस हलके से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, इसका फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। विक्रमादित्य सिंह आज यहां कौशल विकास निगम के मुख्यालय का उद्घाटन करने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए थे। विक्रमादित्य सिंह इस निगम के निदेशक मंडल के सदस्य हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वह शिमला जिला में ही किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। इसमें शिमला ग्रामीण को उनके लिए काफी सुरक्षित माना जा रहा है। वहीं, दूसरा नाम ठियोग विधानसभा क्षेत्र का आ रहा है।

congress-svg-1यहां से आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स विधायक हैं। यह सीट भी विक्रमादित्य के लिए काफी ज्यादा दिक्कतों भरी नहीं है। क्योंकि इस हलके में रामपुर से सटे कुमारसैन और कोटगढ़ का क्षेत्र है। वहीं, तरफ शिमला ग्रामीण का हलका भी इससे जुड़ता है। चौपाल विधानसभा हलके को भी उनके लिए उपयुक्त माना जा रहा है। इस सीट से अभी निर्दलीय विधायक बलवीर वर्मा विधायक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस मात्र 600 वोटों से हारी थी। इस हलके में कांग्रेस की अच्छी पैठ है। चर्चा में सोलन जिले का अर्की हलका भी है। विक्रमादित्य सिंह इस सीट से भी भाग्य आजमा सकते हैं। इसका कारण यहां कांग्रेस की अच्छी पैठ होने के बावजूद सशक्त उम्मीदवार का न होना है। अभी यहां से भाजपा के गोबिंद राम विधायक हैं।

यहां दो चुनाव में कांग्रेस गुटबाजी और सशक्त उम्मीदवार न होने के चलते ही हार खाती रही है। ऐसे में इस सीट पर भी विक्रमादित्य सिंह को उतारे जाने की संभावना है। बहरहाल, कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतिकार उनके लिए कौन सा विधानसभा क्षेत्र चुनते हैं यह तो समय के गर्भ में भी है। लेकिन यह तय है कि वीरभद्र सिंह अपनी राजनीतिक सक्रियता के दौर में ही अपने पुत्र को प्रदेश की राजनीति में मुकाम दिलाने के जुट गए हैं।

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