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अप्रैल में Lockdown के दौरान 21 राज्यों को हुआ 971 अरब का घाटा; जानें Himachal को कितना

अप्रैल में Lockdown के दौरान 21 राज्यों को हुआ 971 अरब का घाटा; जानें Himachal को कितना

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नई दिल्ली। भारत में जारी कोरोना वायरस (Coronavirus) के कहर के बीच देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। इस बीच सामने आई इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के चलते अप्रैल में भारत के 21 प्रमुख राज्यों को 971 बिलियन (971 अरब) रूपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। इस दौरान हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) को 6.5 अरब का घाटा झेलना पड़ा है। हिमाचल के अलावा देश के अन्य प्रमुख राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र (13,187 करोड़ रुपए), उत्तर प्रदेश (11,120 करोड़ रुपए), तमिलनाडु (8,412 करोड़ रुपए), कर्नाटक (7,117 करोड़ रुपए), गुजरात (6,747 करोड़ रुपए), तेलंगाना (5,393 करोड़ रुपए) और राजस्थान (5,920 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है। बतौर फर्म, लॉकडाउन में 40% अर्थव्यवस्था चल रही है।

सरकारों को मिलने वाली प्राप्तियों की मात्रा और समय के बारे में कोई निश्चितता नहीं है

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रमुख अर्थशास्त्री और निदेशक डॉ सुनील कुमार सिन्हा ने बताया कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें नकदी प्रवाह में कमी के संकट से जूझ रही हैं, लेकिन राज्यों की समस्याएं ज्यादा अनिश्चित हैं क्योंकि Covid-19 के खिलाफ वास्तविक लड़ाई राज्य लड़ रहे हैं और उससे संबंधित खर्च भी वे खुद ही कर रहे हैं। एक मीडिया संस्थान के साथ बातचीत के दौरान सिन्हा ने आगे कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में केंद्र सरकार से राज्य सरकारों को मिलने वाली प्राप्तियों की मात्रा और समय के बारे में कोई निश्चितता नहीं है।

लॉकडाउन के दौरान आवश्यक सेवाओं से राजस्व का एक छोटा सा हिस्सा ही प्राप्त हुआ

उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा, राज्यों में राजस्व के अपने खुद के स्रोत अचानक निचले स्तर तक गिर गए हैं। इसके चलते राज्य सरकारों को कई उपाय अपनाने पड़ रहे हैं और राजस्व उत्पन्न करने के नये तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा है। गौरतलब है कि राज्यों को लॉकडाउन के दौरान आवश्यक सेवाओं से राजस्व का एक छोटा सा हिस्सा ही प्राप्त हुआ है। एसजीएसटी, वैट, बिजली कर और शुल्क जो मुख्य आय के स्रोत हैं, उनका बड़ा हिस्सा लॉकडाउन के चलते नहीं मिल पाया। इस तरह के बेहद कम कर संग्रह के चलते राज्यों को अप्रैल, 2020 में बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हुआ है।

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