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सीएम वीरभद्र के खिलाफ सुक्खू के पांच सचिवों का पत्र बम

सीएम वीरभद्र के खिलाफ सुक्खू के पांच सचिवों का पत्र बम

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यशपाल शर्मा/शिमला। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिवों और सीएम वीरभद्र सिंह के बीच आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के दो सचिवों के शनिवार को इस्तीफ़ा देने के बाद सोमवार शाम पांच सचिवों मनजीत ठाकुर (पूर्व जिला परिषद सदस्य व बीडीसी), अमिंद्र ठाकुर (पूर्व बीडीसी चेयरमैन), रितेश कपरेट (पूर्व निर्वाचित प्रदेश महासचिव युवा कांग्रेस शिमला संसदीय क्षेत्र), महेश शर्मा (पूर्व उपाध्यक्ष) व दीपक राठौर ने सीएम वीरभद्र सिंह के खिलाफ पत्र बम फोड़ दिया है। इन्होंने पार्टी सचिवों व कांग्रेस पर बार-बार की जा रही अनावश्यक टिप्पणियों को पत्र लिखकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के संज्ञान में लाया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें टिप्पणियों से गहरा आघात लगा है। वे पत्र के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष को अपने मन की पीड़ा बता रहे हैं।

sukhuसुखविंद्र सुक्खू को लिखे पत्र में जाहिर की मन की पीड़ा

सचिवों ने नौ अहम बिंदुओं की ओर भी सुक्खू का ध्यान आकर्षित किया है। पांचों सचिवों ने सीएम से पूछा है कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सचिव बने तीन साल हो चुके हैं। आप अब इसे सार्वजनिक मंचों पर क्यों उठा रहे हैं। पार्टी प्लेटफॉर्म पर आपको बात रखनी चाहिए थी। ये ठीक है कि आप सर्वोच्च हैं, लेकिन आम कांग्रेस कार्यकर्ता की भी कोई इज्जत है। आप राजनीतिक मंच से उनके आत्मसम्मान को उछाल रहे हैं, जिससे वे आहत हैं। आम पार्टी कार्यकर्ता के खिलाफ तो सार्वजनिक बयानबाजी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी जाती है। मोदी के बोल, जुमलों के ढोल कार्यक्रम से 30 हजार लोगों तक पार्टी की बात, सरकार की नीतियां व उपलब्धियां पहुंचाई गईं। इसमें सैंकड़ों लोग आए, जिसमें सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ये इस बात का प्रतीक है कि सचिवों ने कितनी मेहनत की है। इससे प्रदेश में नई लीडरशिप का पदार्पण हुआ है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिवों और राज्य सरकार के बोर्ड और निगमों के चेयरमैन-वाईस चेयरमैन की योग्यता देखी जाए तो उनसे हम योग्य हैं। वे भी मनोनीत हैं और हम भी। सीएम साहब, चाटुकारिता संगठन में नहीं, सत्ता में होती है। संगठन में तो संघर्ष की आग में तपकर कुंदन बना जाता है। वे कांग्रेस की नींव के वे पत्थर हैं, जो सामने नहीं दिखते। नीचे दबे रहकर नींव को मजबूत करते हैं। पार्टी किसी नेता की जागीर नहीं, कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से खड़ी हुई है और उनकी जागीर है। पार्टी ही नेता बनाती है। हमने पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद के चुनाव जीते हैं। इसलिए पीसीसी सचिव पंच का चुनाव नहीं जीत सकते, ऐसी टिप्पणी शोभा नहीं देती। सरकार में बोर्ड-निगमों के 100 चेयरमैन-वाईस चेयरमैन हैं। उनमें से कितनों ने पंच का चुनाव लड़ा और जीता है।

virbhadra_singhक्या सीएम व मंत्रियों के पुत्रों को ही पद का अधिकार

क्या सीएम व मंत्रियों के पुत्रों को ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पद पाने का अधिकार है। क्या आम कांग्रेस कार्यकर्ता पीसीसी सचिव नहीं बन सकता। हमारी ईश्वर से प्रार्थना है कि अगली बार वे भी सीएम और मंत्रियों के घर में पैदा हों। वे लोग बीस साल से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। कभी पार्टी को छोड़ने की धमकी नहीं दी, न कभी पार्टी छोड़ी। अपनी जेब से खर्च कर हमेशा पार्टी का साथ दिया है। जहां भी, जिस भी ब्लॉक में ड्यूटी लगी, पार्टी को मजबूत ही किया। वे बताना चाहते हैं कि हरियाणा-पंजाब में पीसीसी सचिवों की संख्या हिमाचल से ज्यादा है। हिमाचल में तो सिर्फ 60 सचिव और 6 महासचिव हैं, जबकि पंजाब में 307 सचिव और 96 महासचिव हैं। हरियाणा में सचिवों की संख्या 150 है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों से बयानबाजी करने पर पार्टी में हताशा फैलेगी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव सरकार को दोबारा सत्ता में लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री के वक्तव्य मिशन रिपीट को धक्का पहुंचा सकते हैं। मालूम हो कि सचिवों के इस पत्र के बाद राजनीतिक भूचाल आने के आसार हैं।

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