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पौंग झील में 60 हजार विदेशी मेहमानों का डेरा, विभाग अलर्ट, लगाए सीसीटीवी

पौंग झील में 60 हजार विदेशी मेहमानों का डेरा, विभाग अलर्ट, लगाए सीसीटीवी

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धर्मशाला। विश्व प्रसिद्ध रामसर साइट वेटलैंड महाराणा प्रताप सागर (पौंग झील) में ठंड बढ़ने के साथ ही प्रवासी पक्षियों का आगमन बढ़ना शुरू हो गया है। अभी तक की हुई रूटीन गणना के मुताबिक़ पौंग झील में 43 प्रजातियों के 60 हजार विदेशी परिंदे पहुंच चुके हैं। इन मेहमानों की सुरक्षा के लिए वन्य प्राणी विभाग पूरी तरह तैयार है। अवैध शिकार की रोकथाम के लिए टीमें बनाकर निगरानी की जा रही है। विभाग द्वारा पौंग झील के एरिया में शिकारियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं जो कि हर आने जाने वाले व्यक्ति पर नजर रख रहे हैं। अब जो भी पौंग झील का दीदार करने आएगा उसे पहले एंट्री गेट पर अपनी रजिस्ट्रेशन करवानी होगी।



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दुनिया की इस बेहतरीन वेटलैंड में पक्षियों की संख्या में हर साल रिकॉर्ड वृद्धि हो रही है। हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी पौंग बांध जलाशय के आसपास डेरा डाल चुके हैं। इनकी चहचहाहट से क्षेत्र चहक रहा है। साइबेरिया सहित अन्य देशों में जब तालाबों का पानी जम जाता है, तो ये पक्षी सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर भारत में आते हैं। जब यहां गर्मी शुरू होती है तो यह दोबारा अपने वतन को वापस लौट जाते हैं। साइबेरिया (Siberia) और अफगानिस्तान (Afghanistan) में ठंड ज्यादा होने पर पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर भारत आने लगे हैं। मार्च तक बांध में पक्षियों की लगभग 103 प्रजातियां आती हैं। साल 2018-2019 में प्रवासी पक्षियों की संख्या 1,15,229 लाख रही थी। साल 2017-18 में 62 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों की संख्या 110203 लाख रही थी। वेटलैंड में हर बार नए प्रवासी पक्षी आते हैं। दुनिया की सबसे सुंदर वेटलैंड में शुमार पौंग झील सेंट्रल एशिया के पक्षियों की पहली पसंद है।


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साइबेरिया से लेकर अफगानिस्तान तक के पक्षी सर्दियों में पौंग झील में आते हैं। सेंट्रल एशिया के देशों में नवंबर माह से ठंड बढ़ जाती है। पूरे विश्व के 60 फीसद बारहेडिड गीज (हंस) प्रजाति के पक्षी पौंग झील पहुंच रहे हैं। पौंग बांध जलाशय में पहुंचने वाले पक्षियों में हंस प्रजाति के बार हेडिड गीज सहित कामनटील, नार्दन पटेल, कॉमनकूट, लिटल कोरमोरेंट, चिफचेफ, रुडी, शेल्डक, कामन, पोचार्ड, कमनतीलगडवाल, लिटिल, कोर्मोरेंट, स्पाट्विल, मलार्डबड्र्, युरेशियन टीलमूरहेन ग्रेट इग्रेट पक्षी प्रमुख हैं।
सहायक वन संरक्षक धर्मशाला प्रदीप ठाकुर ने बताया कि इस झील में हर पखवाड़े पक्षियों की सामान्य गणना की जाती है, जबकि वार्षिक गणना 29 और 30 जनवरी को की जाएगी। यह माना जाता है कि जनवरी के अंत में झील में सबसे अधिक प्रवासी पक्षी आते हैं। अक्टूबर से अभी तक करीब 60,000 प्रवासी पक्षी यहां पहुंच चुके हैं। यह झील एक प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है। इन मेहमानों की सुरक्षा के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है।


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