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ये है ऊना अस्पतालः यहां न एंबुलेंस मिलती है ,न डॉक्टर, जानिए क्या है माजरा

ये है ऊना अस्पतालः यहां न एंबुलेंस मिलती है ,न डॉक्टर, जानिए क्या है माजरा

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ऊना। कभी मरीजों की मौत, कभी चिकित्सकों की कमी, तो कभी अव्यवस्थाओं को लेकर ऊना का क्षेत्रीय अस्पताल अकसर विवादों में रहा है। कई दफा नेताओं और उच्चाधिकारियों के औचक निरीक्षणों के बावजूद अस्पताल हालात जस के तस बने हुए है। इस दफा ऊना अस्पताल में बदइंतज़ामी और बेपरवाही ने इंसानियत को शर्मसार करके रख दिया है। क्षेत्रीय अस्पताल के मुख्यद्वार पर हृदय रोग से पीड़ित युवती 4 घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ी तड़पती रही। मंगलवार रात हुए इस घटनाक्रम में अति निर्धन मजदूर परिवार से संबंधित 20 वर्षीय रोशनी को न तो सरकारी एंबुलेंस मिली और न ही कोई आर्थिक मदद मिली।

यहां तक कि डीसी ऊना राकेश कुमार प्रजापति के आदेशों के बाद भी पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाने के लिए युवती को अस्पताल प्रशासन द्वारा एंबुलेंस मुहैया नहीं करवाई हए। बदतर हालात को देखते हुए लोगों ने अपनी तरफ से निजी अस्पताल की एंबुलेंस को किराया देकर युवती को पीजीआई भेजा। इससे पहले 4 घंटे तक युवती अस्पताल के बाहर पड़ी दर्द से कराहती रही लेकिन उसकी मदद करने के लिए सरकारी तंत्र नदारद रहा। इस पूरे मामले के प्रत्यक्षदर्शी प्रवीण सहोता ने बताया कि युवती को एंबुलेंस मुहैया करवाने के लिए सीएमओ, एसएमओ को फोन किए गए लेकिन उन्होंने फोन तक नहीं उठाया। फिर डीसी ऊना को फोन किया और उन्होंने अस्पताल प्रशासन को एंबुलेंस उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए, इसके बावजूद करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली।


डीसी बोले, मामले की खुद जांच करेंगे

सीएमओ ऊना की माने तो गरीबों को निशुल्क एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करवाने के आदेश दिए गए है जिसमें रोगी कल्याण समिति से इसका खर्च वहन किया जाता है। सीएमओ ऊना ने कहा कि अगर आदेशों की अवहेलना हुई है तो मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। डीसी ऊना राकेश प्रजापति ने माना कि रात करीब 12 बजे उन्हें इस मामले फोन आया था और उन्होंने अस्पताल प्रशासन को एंबुलेंस उपलब्ध करवाने के आदेश दिए थे। डीसी ऊना ने कहा कि इस पूरे मामले में वह खुद जांच करेंगे।

फोन पर बुलाने के बावजूद अस्पताल नहीं आए डॉक्टर

दूसरा मामला एक साल के मासूम के साथ पेश आया जिसमें दो साल के एक मासूम की ज़िंदगी भी डॉक्टर नहीं मिलने के कारण खतरे में पड़ गई थी, जिसे बाद में परिजनों द्वारा एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया, तब जाकर उसकी ज़िन्दगी बच सकी। रात को बच्चे को भी इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया, लेकिन बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए नाइट ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने कॉल ऑन ड्यूटी पर तैनात शिशु रोग विशेषज्ञ को बुलाने का निर्णय लिया। लेकिन कॉल ऑन ड्यूटी पर डॉक्टर ने अपना फोन बंद कर रखा था। इसके बाद डॉक्टर को घर से अस्पताल लाने के लिए गाडी भी भेजी लेकिन डॉक्टर ने अपने घर का दरवाजा तक नहीं खोला और अस्पताल की गाड़ी को बेरंग ही लौटना पड़ा।

नाइट ड्यूटी डॉक्टर ने परिजनों से बच्चे को पीजीआई या निजी अस्पताल ले जाने का आदेश सुना दिया। इस पूरी बात को बच्चे के परिजनों ने अपने मोबाइल में रिकार्ड कर रखा है। इसके बाद परिजन मासूम को निजी अस्पताल लेकर गए। इस मामले में सीएमओ के पास रटारटाया जवाब था कि कॉल ऑन ड्यूटी पर तैनात डाक्टर को तलब कर जांच की जाएगी। वहीं खुद डीसी ऊना भी मानते है कि अस्पताल में अव्यवस्था का आलम है। डीसी ऊना ने कहा कि अस्पताल के मामलों की अकसर उनके पास शिकायतें मिलती रहती है। जिसपर स्वास्थ्य मंत्री और उन्होंने खुद अस्पताल का निरीक्षण भी किया है। डीसी ऊना ने कहा कि अस्पताल में व्यवस्थाएं सुचारु करने के लिए उचित दिशा निर्देश दिए जायेंगे।

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