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हिमाचल में बड़ा टैक्स घोटाला : Fake GST Number से किया 107 करोड़ का घपला

हिमाचल में बड़ा टैक्स घोटाला : Fake GST Number से किया 107 करोड़ का घपला

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सोलन। पंजाब के एक व्यापारी पर जिला सोलन में विभिन्न जगह पर फर्जी कंपनियां दर्शाकर करोड़ों के घोटाले (Scam) करने का आरोप लगा है। कमल आहूजा नाम के इस कारोबारी ने भारत के अलग-अलग कोने में अपनी अलग-अलग कंपनियां बनाकर हिमाचल के उद्योगों को कच्चा माल बेच दिया और इन उद्योगों ने उसका रिफंड भी ले लिया, लेकिन कम्प्यूटर में जब इन नंबरों का मिलान किया गया तो पता चला कि ये सब जीएसटी नंबर (GST Number) फर्जी थे, तो वस्तु एवं कर विभाग के अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया। कंपनी के संचालकों ने इस फेरहिस्त में लगभग 107 करोड़ रुपए का टैक्स घोटाला कर दिया, जिसमें से विभाग ने कार्रवाई करते हुए 19 करोड़ 20 लाख की वसूली कर भी ली है। यह सारा तामझाम शातिरों ने नकली बिलिंग के नाम पर इतनी चालाकी से किया कि किसी को कानोंकान खबर नहीं हुई।

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माल एवं सेवा कर महानिदेशालय इंटेलिजेंस विभाग शिमला ज़ोन ने इस सारे प्रकरण का भंडाफोड़ किया है और आरोपियों पर सौ फीसदी जुर्माना (Penalty) भी ठोंका है। विभाग के आला अधिकारियों ने बताया कि गोविंदगढ़, मंडी निवासी कमल आहुजा नाम के एक व्यापारी ने 12 अलग-अलग कंपनियों का गठन किया था, जिसमें छह कंपनियों का वह खुद डायरेक्टर बना हुआ था और छह कंपनियों किसी और नाम से चला रहा था। विभाग के अधिकारियों ने कड़ी छानबीन में पाया कि यह सभी कंपनियां फ्रॉड काम कर रही हैं। जब विभाग ने इनके ऊपर पैनी नजर से कार्य किया, तो पता चला कि इस व्यक्ति ने 107 करोड़ के जाली बिल पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग नाम से बिल काटे हुए थे। इसमें उस व्यक्ति ने बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पांवटा साहिब, कालाअंब व परवाणू में भी कंपनियों के कार्यालय दर्शाए थे।


उन ठिकानों पर जब अधिकारी पहुंचे, तो वहां कोई भी कंपनी नहीं पाई गई, यानि जाली पते दर्शा कंपनियां पंजीकृत करवाई गई थी। जब स्थानीय लोगों से जब छानबीन की गई, तो कंपनी मालिक द्वारा जितने भी बिल काटे गए हैं, वे सब के सब फर्जी ही निकले। कंपनी संचालक को संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा अपनी कस्टडी में लेकर जितना छानबीन करने में पाया गया उसके आधार पर टैक्स वसूला, जिसकी रकम 19 करोड़ 20 लाख रुपए बनती है। उसको विभाग ने व्यक्ति व परिवार की निजी संपत्ति को कब्जे में लेकर वसूला गया। अभी भी इसकी कार्रवाई चली हुई है।

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