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इनकी भी सुध लो सरकार ! तीन भाई मनोरोगी, एक अकेला कर रहा देखभाल – वह भी बेरोजगार

इनकी भी सुध लो सरकार ! तीन भाई मनोरोगी, एक अकेला कर रहा देखभाल – वह भी बेरोजगार

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मंडी। पधर उपमंडल की गवाली पंचायत के डूहका गांव में एक परिवार के चार सदस्यों में तीन मानसिक रोग (Mental illness) से ग्रसित हैं। मानसिक रूप से विक्षिप्त तीनों भाइयों की परवरिश करने वाले माता-पिता का कुछ साल पहले देहांत हो चुका है। अब हालात यह है कि तीनों भाई भूखे-प्यासे आदि मानव की तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। विडंबना यह है कि इस परिवार की न कोई खबर उपमंडल प्रशासन को है ना ही स्थानीय पंचायत के प्रतिनिधियों ने इनकी सुध लेने की कोई कोशिश की है।


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डूहका गांव के लाल सिंह और संती देवी के घर जन्में चार बेटों में तीन बेटे मानसिक रोग से ग्रसित हैं। लाल सिंह और संती देवी का देहांत हो चुका है। चार भाइयों में एक भाई मानसिक तौर पर ठीक हैं जो उनके भोजन-पानी की व्यवस्था करता है। वह खुद भी बेरोजगार (Unemployed) है। दिन भर कड़ी मेहनत कर अपने तीनों भाइयों का पेट भर रहा है, लेकिन जिस दिन कोई काम न मिले तो चारों को भूखे पेट भी सोना पड़ता है।

वहीं, मानसिक रूप से विक्षिप्त यह तीनों भाई कभी तो बिना कपड़ों के घूमते रहते हैं। चार भाइयों में परमदेव (60), राजेंद्र (56), सुरेंद्र (40) और रवि कुमार (35) वर्ष के हैं। चारों की शादी नहीं हुई है। सुरेंद्र कुमार का कहना है कि तीनों भाई 18 साल की उम्र तक ठीक थे। उसके बाद मानसिक तौर पर परेशान रहने लगे। पंचायत की तरफ से न ही इस परिवार को IRDP में लिया गया है और ना कोई सस्ता राशन इन्हें मिलता है। इनके हक-हकूकों को लेकर आवाज उठाने वाला भी कोई नहीं है। परिवार की हालत इतनी दयनीय है कि इनके पास ठंड से बचने के लिए ना गर्म कपड़े और ना कोई ढंग का बिस्तर है। जबकि खाना बनाने के लिए ठीक से बर्तन तक इस परिवार के पास नहीं है। फटे-पुराने कपड़ों से सुरेंद्र कुमार अपने भाइयों का तन ढांपने की कोशिश करता है, लेकिन ये फिर कपड़ों को फाड़ देते हैं। दिनभर मेहनत-मजदूरी करके थक-हारकर घर पहुंचने पर उसे फिर परेशानी झेलनी पड़ती है।सुरेंद्र का कहना है कि कई बार पंचायत में जाकर इस बारे में सूचित किया, लेकिन कोई सुनवाई करने नहीं पहुंचा। माता-पिता ने तीन कमरों का एक पुराना मकान बनाया है। ना कोई शौचालय है ना कोई सरकारी सुविधा आज तक इस परिवार को मिल पाई है। सुरेंद्र का कहना है कि उनकी बड़ी बहन ने कभी कभार उनकी मदद कर देती है, लेकिन महंगाई के इस दौर में वह अपने भाइयों का पेट भरने में सक्षम नहीं है। पूर्व जिला परिषद सदस्य कुन्नू बार्ड रवि चंद का कहना है कि मानसिक तौर से परेशान परिवार को सरकार हर सुविधा प्रदान करें, ताकि इन लोगों को दो वक्त का खाना सही से मिल सके। पंचायत की तरफ से भी हर सुविधा परिवार को मिलनी चाहिए।

एसडीएम पधर शिवमोहन सैनी का कहना है, ‘प्रेस के माध्यम से ही मुझे यह जानकारी मिली है। शीघ्र ही डूहका गांव का दौर कर परिवार की यथास्थिति देखी जाएगी। वहीं पंचायत को भी परिवार की स्थिति देखने के आदेश दिए जाएंगे। प्रशासन की तरफ से जो भी संभव होगा। यथासंभव सहायता पीड़ित परिवार को दी जाएगी।’ गवाली पंचायत प्रधान मीना देवी ने कहा कि पंचायत तीनों मनोरोगियों को जनमंच में लेकर गई थीं, जहां इनकी मेडिकल जांच की गई है, लेकिन आगे कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। अप्रैल माह में पंचायत का जनरल हाउस पूरा होने पर इस परिवार को आईआरडीपी में लिया जाएगा।

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