प्रोटीन और फाइबर का बड़ा स्रोत है अरहर दाल 

प्रोटीन और फाइबर का बड़ा स्रोत है अरहर दाल 

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शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत दाल ही माना जाता है। दालों के बारे में हर राज्य के लोगों की पसंदगी अपनी अपनी जगह है  इन्हीं में एक है अरहर की दाल । यह पूर्व उत्तरी भारत के दलहन की मुख्य फसल है। पूर्वी उत्तरप्रदेश में तो दाल माने तो अरहर की दाल। यह मैदानी भागों में ज्यादा ही पसंद की जाती है जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में इसे लोग कम पसंद करते हैं। इसके बावजूद इस दाल के अपने गुण हैं, जिसकी वजह से हफ्ते में एक बार इसे खाना जरूरी हो जाता है। इसे तूअर दाल भी कहते हैं। जिस इलाके में अरहर की पैदावार होती है वहां इसकी फली को लोग सब्जी के तौर पर खुलकर इस्तेमाल करते हैं। वैसे अरहर की दाल खाने से बॉडी को कई न्यूट्रि‍शंस प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट्स जैसे पोषक तत्व मिलते हैं। अरहर की दाल प्रोटीन और फाइबर का बहुत बड़ा स्रोत है। साथ ही यह कॉलेस्ट्रॉल फ्री है। अरहर की दाल को चावल के साथ खाने से प्रोटीन की कमी नहीं रहती। 
यह आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी और मिनरल्स की कमी को पूरा करती है। अरहर दाल में मौजूद फोलिक एसिड महिलाओं को बहुत फायदा पहुंचाता है। यह महिलाओं के लिए विटामिन का अच्‍छा स्रोत है, खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए। न्‍यूयॉर्क की एक रिसर्च के मुताबिक, भरपूर मात्रा में फोलिक एसिड लेने से दिमाग और रीढ़ की हड्डियों संबंधित बीमारियों से बच सकते हैं। अरहर की दाल कार्बोहाइड्रेट्स का अच्छा स्रोत है जिससे शरीर को एनर्जी मिलती है। जब आप कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ खाते हैं तो ये शरीर में जाकर ग्लूकोज या ब्लड शुगर में ब्रेक हो जाता है। इसके बाद ब्लड शुगर इससे शरीर, दिमाग और नर्वस सिस्टम को एनर्जी देता है।
अरहर दाल  फाइबर का एक अच्छा स्रोत है जिससे कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है। फाइबर युक्त डायट लेने से क्रॉनिक डिजीज नहीं होती। नियमित रूप से फाइबर डायट में शामिल करने से दिल संबंधी रोग, स्ट्रोक, कई तरह के कैंसर, कार्डियोवस्कुलर डिजीज और टाइप 2 डायबिटीज से बचा जा सकता है।अरहर की दाल का पानी पिलाने से भांग का नशा उतर जाता है।गर्मी के कारण या बदहजमी से मुह में छाले हो गये हो तो अरहर की छिलको सहित दाल को पानी में भिगोकर इस पानी के कुल्ले व गरारे करने से छाले कुछ दिनों में ठीक हो जातें हैं ।

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