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इस बार बाबा भलकू की स्मृति में होगा अनूठी साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन

इस बार बाबा भलकू की स्मृति में होगा अनूठी साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन

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दयाराम कश्यप, सोलन। विश्व धरोहर के रूप में विख्यात शिमला-कालका रेल ( Shimla-Kalka Rail ) में 11 अगस्त को गत वर्ष की तरह अनूठी साहित्यिक गोष्ठी (literary seminar) बाबा भलकू की स्मृति में आयोजित की जाएगी। अपने आप में यह अलग तरह का साहित्यिक आयोजन हिमालय साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसमें हिमाचल के 33 रचनाकार व संस्कृतकर्मी भाग ले रहे हैं।

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इस गोष्ठी को बाबा भलकू की स्मृति और सम्मान में समर्पित किया गया है। भलकू चायल के समीप झाझा गांव का एक अनपढ़ किन्तु विलक्षण प्रतिभा संपन्न ग्रामीण था, जिसकी सलाह और सहयोग से अंग्रेज इंजीनियर (English engineer) शिमला-कालका रेलवे लाइन के निर्माण में सफल हो पाए थे। हरनोट के अनुसार यह यात्रा सुबह 10-40 बजे शिमला से शुरू होगी और बड़ोग तक चलेगी। वहां दोपहर के भोजन और ठहराव के बाद तीन बजे पुन: शिमला की और रवाना होगी। यह जानकारी हिमालय मंच के अध्यक्ष और लेखक एसआर हरनोट ने दी।

 

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हरनोट ने बताया कि हिंदुस्तान तिब्बत रोड के निर्माण के वक्त भी बाबा भलकू के मार्ग निर्देशन में न केवल सर्वे हुआ, बल्कि सतलुज नदी पर कई पुलों का निर्माण भी हुआ था, जिसके लिए उन्हें ब्रिटिश सरकार के लोक निर्माण विभाग द्वारा ओवरशीयर की उपाधि से नवाजा गया था। वर्ष 1947 में सेवानिवृत्ति के उपरांत उनकी सेवाएं उस वक्त कालका-शिमला रेलवे लाइन के सर्वेक्षण में ली गई, जब परवाणु से शिमला के लिए चढ़ाई देखकर ब्रिटिश अभियंताओं को समझ नहीं आ रहा था कि आगे का सर्वेक्षण कैसे करें। बताया जाता है कि भलकू अपनी एक छड़ी से नपाई करता और जगह-जगह सिक्के रख देता और उसके पीछे चलते हुए अंग्रेज सर्वे का निशान लगाते चलते। इस तरह जहां ब्रिटिश प्रशासन के धुरंधर इंजीनियर फेल हो गए, वहां शिमला से 73 किलोमीटर दूर झाझा गांव, जो विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल चायल से 8 किलीमीटर दूर है, के निवासी इस अनपढ़ ग्रामीण ने बड़ी सहजता से इस कार्य को अंजाम दिया था।

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