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मंडी का सायरी गांव एक सप्ताह से प्यासा

मंडी का सायरी गांव एक सप्ताह से प्यासा

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मंडी। बरसात का मौसम बीत गया और हिमाचल प्रदेश में ग्रामीणों के हल्ख एक बार फिर से सूखने लग गए। बात मंडी जिला mandi2मुख्यालय के साथ लगते सायरी गांव की हो रही है। ग्राम पंचायत मझवाड़ के तहत आने वाले इस गांव के लोग बीते एक सप्ताह से पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं लेकिन विभाग यहां पर पानी की सप्लाई को सुचारू बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। हैरत तो इस बात को लेकर है कि सायरी गांव से होकर ही आगे मझवाड़ गांव के लिए पानी की सप्लाई जाती है। मझवाड़ गांव में पानी की सप्लाई सुचारू है, लेकिन सायरी गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस बारे में कई बार विभाग को शिकायत दी, लेकिन आज-कल करते-करते एक लंबा अरसा बीत गया मगर समस्या का समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों को खुद के लिए भी कई किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आईपीएच विभाग से सायरी गांव के लिए पानी की सप्लाई को सुचारू बनाने की मांग उठाई है, ताकि ग्रामीणों को पानी के लिए दर-दर की ठोकरें न खानी पड़े।

हमीरपुर में स्थापना दिवस मनाएगा महासंघ

मंडी। हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का 51वां स्थापना दिवस इस बार हमीरपुर में मनाया जाएगा। mandi-newsकर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री एनआर ठाकुर ने बताया कि इस बार भी हर वर्ष की भांति फैडरेशन-डे को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। समारोह की अध्यक्षता राज्य प्रधान सुरेंद्र ठाकुर करेंगे। इस दिन सभी जिला व विभागीय संगठनों के पदाधिकारी हमीरपुर में एकत्रित होंगे। इस दिन महासंघ की एक जरुरी बैठक भी हमीरपुर में आयोजित की जा रही है जिसमें सरकार के खिलाफ संघर्ष की रणनीति को अंतिम रुप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में  कांग्रेस सरकार का कार्यकाल कर्मचारी और मजदूर वर्ग के लिए बेहद निराशाजनक रहा है। इस कालखंड में एक भी मांग कर्मचारियों की पूरी नहीं हो सकी। कांग्रेस सरकार ने असली महासंघ के पदाधिकारियों से वार्ता बंद करके एक समानांतर सरकार प्रायोजित महासंघ का गठन करके कर्मचारियों को बांटने का प्रयास किया, लेकिन यह दाव सरकार पर ही भारी पड़ गया। सरकार द्वारा प्रायोजित महासंघ के पदाधिकारियों के साथ चार वर्षों में केवल एक ही संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक हुई वह भी बेनतीजा साबित हुई। अपने स्वार्थ पूर्ति के चलते जो स्वयंभू कर्मचारी नेता सरकार के झूठे स्तुतिगान में मशगूल हैं उन्हें आज कर्मचारियों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ रहा है। 10 प्रतिशत कर्मचारियों का समर्थन भी ऐसे तथाकथित स्वयंभू कर्मचारी नेताओं को प्राप्त नहीं है। आज प्रदेश का कर्मचारी अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। कर्मचारी, मजदूर और अनुबंध कर्मियों के लिए किए गए चुनावी वादे हवा-हवाई हो गए। यही वजह है कि प्रदेश के कर्मचारी स्थापना दिवस के अवसर पर 20 नवंबर को हिमाचल सरकार के खिलाफ हमीरपुर से संघर्ष का ऐलान करेंगे। एनआर ठाकुर ने कहा कि संघर्ष के पीछे मुख्य मांगों का ठोस आधार है जिनमें चुनावी वादे के मुताबिक 4-9-14 का लाभ 2006 से देना, पंजाब की तर्ज पर भते देना तथा 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से पहले पिछली विसंगतियां दूर करना, सेवानिवृति आयु डॉक्टरों की तर्ज पर 60 वर्ष करना, अनुबंध कर्मियों को नियमित करने का सेवाकाल 5 वर्ष से घटाकर तीन वर्ष करना तथा करुणामूलक आधार पर नौकरियां प्रदान करना आदि शामिल है।

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