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डीएलएड परिणाम में देरी पर मचा बवाल, छात्रों ने दी घेराव की धमकी

3000 डीएलएड छात्रों के भविष्य के साथ हो रहा है खिलवाड़

डीएलएड परिणाम में देरी पर मचा बवाल, छात्रों ने दी घेराव  की धमकी

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धर्मशाला। डीएलएड प्रशिक्षित छात्र संघ प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक ठाकुर (Abhishek Thakur) ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (Himachal Pradesh School Education Board) के ढीले रवैये को लेकर जमकर कोसा है। उन्होंने कहा कि लगभग एक वर्ष पूरे हो जाने पर भी डीएलएड (Dled) पहले और दूसरे वर्ष के परीक्षा परिणामों को निकालने में शिक्षा बोर्ड असमर्थ रहा है। अभिषेक ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि 3000 डीएलएड छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि सितंबर 2018 में बैठे इस बैच को सितंबर 2020 में पास आउट हो जाना चाहिए था, लेकिन करोना समय के चलते टीपी (टीचिंग प्रैक्टिस) पूरी नहीं होने के कारण इसमें और समय लिया गया था।

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ऑनलाइन माध्यम की टीपी को नकारा गया

अभिषेक ठाकुर ने कहा की वर्ष 2020 में भी काफी डीएलएड छात्र सम्पूर्ण लॉकडाउन (Lockdown) के चलते ऑनलाइन माध्यम से हर घर पाठशाला के द्वारा 4 माह की (टीपी) लगा चुके थे। लेकिन बाद में उसे शिक्षा बोर्ड द्वारा नकार दिया गया।
वहीं, बीते साल नवम्बर में प्राथमिक स्कूलों (Primary School) में चौथी और पांचवी कक्षा बुलाए जाने पर फिर से उनकी टीपी को लेकर दिशा निर्देश जारी किए गए। साथ ही कुछ कॉलेज छात्र जिनकी टीपी भौगोलिक कारणों की वजह से पूरी नहीं की जा सकी थी, उन्हें छूट दी गई थी। लेकिन इस पूरे प्रक्रिया में बोर्ड ने छात्रों का एक साल का अतिरिक्त समय ले लिया। जिसका खामियाजा सिर्फ छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। इस बीच ना ही वे कॉलेज (College) में दाखिला ले सके और ना किसी अन्य कोर्स करने के लिए वे मान्य थे।

सरकार ने अबतक नहीं की शिक्षकों की नियुक्ति

अभिषेक ठाकुर ने बताया की वहीं दूसरी ओर मौजूदा सरकार अपने कार्यकाल में एक भी जेबीटी अध्यापकों (JBT Teachers) की नियुक्ति प्राथमिक स्कूलों में नहीं कर पाई है। कई स्कूलों में सिर्फ एक ही अध्यापक है। कहने को ऑनलाइन पढ़ाई चली है, लेकिन पहली से पांचवी तक 5 कक्षाओं को एक अध्यापक कैसे पढ़ाते होंगे वो एक हास्यजनक बात है। वहीं, बच्चों के साथ भी सरकार खिलवाड़ कर रही है।

विभाग के पास था सुनहरा मौका

कोरोना काल में निजी स्कूलों (Private School) की मनमानी फीस के चलते काफी बच्चों के दाखिले सरकारी स्कूलों में हुए थे। तब विभाग के पास एक सुनहरा मौका था। इस समय अपने स्कूलों की स्थिति को ठीक करते हुए अध्यापकों की कमी को पूरा करे। ताकि निजी स्कूलों से आए हुए बच्चों के दाखिलों में और इजाफा हो, लेकिन मौजूदा हाल क्या हैं। ये सभी बखूबी जानते हैं। प्रदेश में जब भावी अध्यापकों का भविष्य खराब होता हुआ नजर आ रहा हो तो बच्चों के भविष्य के साथ क्या होगा। अभिषेक ठाकुर ने सरकार व विभाग से आग्रह किया है कि डीएलएड प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों का परीक्षा परिणाम जल्दी निकालें। नहीं तो संघ जल्द ही इस विषय पर सरकार व विभाग को घेरेगी।

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