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दिव्यांगता Pooja की कमजोरी नहीं, चुनौती है

दिव्यांगता Pooja की कमजोरी नहीं, चुनौती है

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Ability Award : रेवाड़ी। वो पिता की गोद में सवार होकर हर रोज बैंक जाती है लेकिन अपने परिवार का सबसे बड़ा सहारा भी वही है। दिव्यांगता उसकी कमजोरी नहीं बल्कि उसके लिए चुनौती है, जिससे वह हर रोज पार पाती है। शहर के मोहल्ला नई आबादी की रहने वाली पूजा गुप्ता उदाहरण है, उन लोगों के लिए जो जरा सी तकलीफ में घबरा जाते हैं। शत-प्रतिशत विकलांग पूजा ने अपने हौंसलों व हिम्मत से बैंक अधिकारी की नौकरी हासिल की और हाल ही में वह प्रदेश की एक मात्र बेटी भी बनी, जिसे चेन्नई की एबिलिटी फाउंडेशन संस्था की ओर से एबिलिटी अवार्ड 2017 से सम्मानित किया गया है। 

  • बुजुर्ग माता-पिता व दो छोटे भाइयों का सहारा है पूजा
  • देश की छह प्रतिभाओं में बनाई जगह, अवार्ड से मिली हौसलों को उड़ान

देश की छह प्रतिभाओं में बनाई जगह

नई आबादी निवासी अजय गुप्ता की बड़ी बेटी पूजा जन्म के समय बिलकुल ठीक थी लेकिन छह माह के बाद उसे अजीब तरह की बीमारी होने लगी। उसके हाथ व पैर में सेंसेशन बिलकुल कम होती चली गई। दोनों ने धीरे-धीरे काम करना ही बंद कर दिया। चिकित्सकों को दिखाया तो पता चला वह एटेक्सिया नामक बीमारी से ग्रसित है। चिकित्सक इसे जींस की प्रॉब्लम मानते हैं तथा इस बीमारी का कोई उपचार नहीं है। असाध्य रोग से पीड़ित होने के बावजूद पूजा ने हार नहीं मानी। पढ़ाई में अव्वल रहने वाली पूजा ने शहर के अहीर कॉलेज से एमकॉम तक की पढ़ाई की। बैंक के प्रोबेशनरी ऑफिसर की परीक्षा दी और सफलता हासिल करते हुए 28 जुलाई, 2014 को बतौर पीओ पीएनबी बैंक की मुख्य शाखा में नौकरी ज्वाइन की। स्कूल व कॉलेज में नियमित तौर पर पढ़ाई करने वाली पूजा बैंक की नौकरी में भी उतनी ही समर्पित है। हर रोज सुबह पिता अजय गुप्ता व चाचा बृजभूषण गुप्ता उसे बैंक तक पहुंचाते हैं। इसके आगे का सफर दिनभर पूजा खुद ही तय करती है। बैंक अधिकारी पूजा अन्य कर्मचारियों की तरह ही बैंक का हर काम निपटाती है। अंगुलियों के बीच में पेन फंसाकर चलाती है तो लेपटाप व मोबाइल का भी अकड़ी हुई अंगुलियों के सहारे व कोहनी से इस्तेमाल करती है। घर में मां सुनीता गुप्ता उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है। बुजुर्ग माता-पिता व दो छोटे भाइयों का सहारा आज पूजा ही है।


अवार्ड से मिली ऊंचाई

सिर्फ पूजा ही नहीं सबसे छोटा भाई निखिल भी इसी बीमारी से पीड़ित है। हालांकि एक भाई लोकेश गुप्ता पूरी तरह से सामान्य है। लोकेश को पता चला कि चेन्नई की संस्था एबिलिटी फाउंडेशन दिव्यांगता को मात देकर कामयाब होने वाले लोगों को सम्मानित करती है। लोकेश ने अपनी बहन पूजा की कामयाबी की कहानी के बारे में संस्था को मेल कर दिया। संस्था के लोग जनवरी में रेवाड़ी आए तथा पूजा के सफर पर पूरी विडियोग्राफी की।

18 फरवरी को पूजा देश के उन छह दिव्यांगों में शामिल हुई जिन्हें संस्था की ओर से एबिलिटी अवार्ड 2017 से पुरस्कृत किया गया। उसे पुरस्कार के तौर पर ट्राफी ,सर्टिफिकेट व 1 लाख की नकद राशि दी गई। पूजा प्रदेश की एकमात्र दिव्यांग रही, जिसे यह सम्मान मिला। पूजा अब आईएएस की तैयारी कर रही है और उसका सपना है कि वह अपने जैसे दिव्यांगों के लिए संस्था चलाए।

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