पौंग बांध निर्माण के दौरान उजड़े 339 गांवों के परिवारों की पहचान के निर्देश

अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा ने राहत एवं पुनर्वास उपायुक्त को दिए निर्देश

पौंग बांध निर्माण के दौरान उजड़े 339 गांवों के परिवारों की पहचान के निर्देश

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रविंद्र चौधरी/रैहन। अतिरिक्त मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश मनीषा नंदा शुक्रवार को राहत एवं पुनर्वास कार्यालय राजा का तालाब में पहुंची। इस दौरान उन्होंने राहत एवं पुनर्वास उपायुक्त विनय मोदी को पौंग बांध निर्माण के दौरान उजड़े 339 गांवों के परिवारों की पहचान करके उनके पास जाकर जनमंच के माध्यम से उनकी समस्याओं का ब्यौरा बनाने की बात कही।
इस दौरान  प्रदेश पौंग बांध विस्थापित कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधान हंसराज चौधरी की अध्यक्षता में उनसे मिला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने 47 सालों से विस्थापन का दंश झेलते हुए उत्पन्न हो रही विभिन्न समस्याओं के प्रति व राजस्थान सरकार द्वारा विस्थापितों के हितों के साथ किए जा रहे खिलवाड़ के बारे उन्हें अवगत करवाया। हंसराज चौधरी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को बताया कि राजस्थान में विस्थापितों के लिए जिला गंगानगर में आरक्षित 2 लाख 20 हजार एकड़ भूमि पर अभी तक  विस्थापितों को पूर्ण रूप से बसाया नहीं जा सका। वहां पर विस्थापितों को बसाया जाए। हंस राज ने उन्हें बताया कि 1188  मुरब्बों के मामलों में 124 मामले ऐसे हैं, जिन्हें न तो विस्थापितों ने बेचा है और न ही उन पर किसी को कब्जा दिया है। परन्तु हेराफेरी करके उन्हें 1188 राज रकब्बों में डाल दिया गया है। वहीं, इंदिरा गांधी नहर वाला पानी जोकि विस्थापितों की 3.50 लाख भूमि की सिंचाई के लिए था। उसे पूरे राजस्थान में फैला दिया है। वहीं प्रतिनिधिमंडल ने उनसे राजस्थान के जिला गंगानगर की आरक्षित भूमि में एकमुश्त सेटलमेंट देने की मांग की। वहीं, भूमि का प्रावधान न होने पर पिछले 47 सालों के आधार पर मुआवजा देने की मांग की।
इस मौके पर उपस्थित पौंग बांध विस्थापितों ने अपनी अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत करवाया। हंसराज ने अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा से सभी उक्त समस्याओं को हल करने करने का आग्रह किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को सुनने के उपरांत कहा कि प्रदेश सरकार उनकी समस्याओं को राजस्थान सरकार के समक्ष सकारात्मक ढंग से उठाएगी और उनका यह प्रयास रहेगा कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द हो सके।

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